डॉ. नीरज बसंतानी ने कहा कि एआई का उपयोग होने लगा है लेकिन अगले दस साल में मरीजों की बीमारी की डायग्नोस करना बेहद आसान होगा और सटीक जांच हो सकेगी। कैंसर, किडनी-लिवर, हृदय रोग, मस्तिष्क की सर्जरी रोबोट करेंगे। डॉ. मयंक जैन ने कहा कि एआई का उपयोग करते समय विशेष सावधानी बरतनी होगी। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राकेश भाटिया ने कहा कि भले ही एडवांस्ड तकनीकी उपयोग में लाई जाए, लेकिन स्टेथोस्कोप और नब्ज देखने की कला को मात देना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि इससे मरीज में सकारात्मक भाव विकसित होता है।
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आईएमए अध्यक्ष डॉ. पंकज नगायच ने पैनल डिस्कशन में पीसीपीएनडीटी एक्ट के बारे में कहा कि मानवीय त्रुटियों पर विभाग डॉक्टरों का शोषण न करें। इंडियन सोसाइटी ऑफ क्रिटिकल केयर मेडिसिन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रणवीर त्यागी और डॉ. दीप्तिमाला अग्रवाल ने आईसीयू में चिकित्सकीय मानकों के बारे में बताया।
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उद्घाटन में मुख्य अतिथि डॉ. कपिल त्यागी और विशिष्ट अतिथि सीएमओ डॉ. अरुण श्रीवास्तव रहे। सेमिनार में डॉ. वीरेंद्र खंडेलवाल, डॉ. केके विश्वानी, डॉ. शम्मी कालरा, डॉ. संतोष कुमार, डॉ. संजय चतुर्वेदी, डॉ. जेएन टंडन, डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ, डॉ. नरेश त्यागी, डॉ. लवप्रिया शर्मा, डॉ. संदीप अग्रवाल, डॉ. रजनी पचौरी, डॉ. सीमा सिंह, डॉ. हरी सिंह, डॉ. मुकेश भारद्वाज आदि मौजूद रहे।
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