आगरा। केंद्रीय हिंदी संस्थान में भारतीय पुस्तकालय संघ (आईएलए) की ओर से तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की जा रही है। शुक्रवार को दूसरे दिन पुस्तकालय सेवाओं में एआई के बढ़ते प्रभाव पर विमर्श किया गया।
कुल चार शैक्षणिक सत्र किए गए, इनमें देश-विदेश से आए विद्वानों और शोधार्थियों ने शोध प्रस्तुत किए। बताया गया कि एआई किस प्रकार पारंपरिक पुस्तकालयों को स्मार्ट, उपयोगकर्ता-केंद्रित और डाटा-संचालित ज्ञान केंद्रों में परिवर्तित कर रही है। इस दौरान एआई आधारित स्मार्ट लाइब्रेरी, डिजिटल टूल्स का उपयोग, उपयोगकर्ता सहभागिता, सामाजिक समावेशन, पुस्तकालय स्वचालन, ई-संसाधनों की भूमिका, शोध सहयोग सेवाएं, डिजिटल एवं सूचना साक्षरता, सार्वजनिक पुस्तकालयों का आधुनिकीकरण और भविष्य की पुस्तकालय सेवाओं जैसे विषयों पर चर्चा की गई।
सत्रों में पुस्तकालय विज्ञान में तकनीकी नवाचार, चैटजीपीटी और जनरेटिव एआई के उपयोग, शोध एवं शिक्षण में एआई की भूमिका, समुदाय तक ज्ञान की समान पहुंच जैसे मुद्दों को उठाया गया। इस दौरान डॉ. सुनील उपाध्याय, प्रो. राजकुमार भाकर, प्रो. अभिजीत सिन्हा, प्रो. संजय कुमार सिंह, प्रो. यूसी शर्मा, डॉ. ओएस प्रसाद आदि कई वक्ता उपस्थित रहे।