एआई विशेषज्ञ एन. नागराजन ने डाटा सेंटरों में बिजली और पानी की भारी खपत को लेकर सरकारों को कंपनियों से करार करते समय सावधानी बरतने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि डाटा सेंटरों की बढ़ती संख्या से ऊर्जा की मांग बढ़ेगी और इसका स्थानीय पर्यावरण पर असर पड़ सकता है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते उपयोग के साथ देश में बड़ी संख्या में डाटा सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं। एआई विशेषज्ञ एन. नागराजन ने सरकारों को इन सेंटरों को लाने वाली कंपनियों से करार करते समय बेहद सावधानी बरतने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि डेटा सेंटरों में बिजली और पानी की अत्यधिक खपत होती है, जिससे स्थानीय पर्यावरण पर असर पड़ सकता है।
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नागराजन ने यह बात शुक्रवार को अर्थ जर्नलिज्म नेटवर्क की नवीकरणीय ऊर्जा कार्यशाला के दूसरे दिन कही। उन्होंने बताया कि डाटा सेंटरों की बढ़ती संख्या से ऊर्जा की मांग भी तेजी से बढ़ेगी। कार्यशाला के दूसरे दिन नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार के सामने मौजूद दो बड़ी चुनौतियों पर चर्चा हुई। इनमें कमजोर विद्युत संचरण नेटवर्क और ऊर्जा भंडारण के लिए बैटरियों की ऊंची लागत शामिल थी।
सीईईडब्ल्यू की निकोल अल्मेडा ने नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में रोजगार की संभावनाओं पर प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि स्वच्छ ऊर्जा का विस्तार केवल बिजली उत्पादन और पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं है। यह क्षेत्र बड़ी संख्या में रोजगार भी पैदा कर रहा है। अर्थ जर्नलिज्म नेटवर्क की कार्यशाला का शनिवार को आखिरी दिन है।