कासगंज। दस साल बाद फिर से जून माह में इंद्र देव जनपद से रूठ गए, जिससे यह माह पूरी तरह से सूखा चला गया। इस माह में बारिश न होने से जिले में सूखे के हालात बनने लगे हैं। किसानों को अपनी खरीफ की फसल के प्रभावित होने का खतरा सता रहा है।
जनपद में 1,40,700 हेक्टेयर कृषि भूमि है। इस भूमि की सिंचाई के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। वैसे तो जनपद की औसत वर्षा 750 मिमी मानी जाती है, लेकिन अधिकांश वर्षा जून से सितंबर के मध्य होती है। इन चार माह की औसत वर्षा 600 मिमी मानी जाती है। इस सीजन में खरीफ की फसल की पैदावार होती है। इस फसल को पानी की काफी आवश्यकता रहती है। धान की पौध तैयार करने, मक्का की बुवाई तो जून माह में ही हो जाती है। जबकि बाजरा, व उरद, मूंग की बुवाई जुलाई माह में होती है। जून माह के सूखे रहने से किसान चिंतित है। किसान ने धान की पौध तैयार कर ली है। 25 प्रतिशत मक्का की बुवाई भी हो चुकी है, लेकिन बारिश न होने से फसल प्रभावित होने लगी है। बाजरा व दलहन की फसल की बुवाई के लिए किसान ने खेत की जुताई तो कर ली है, लेकिन उसे बारिश होने का इंतजार है।
सिंचाई के अन्य संसाधन
कहने को तो 459.01 किमी में नहरें फैली हुई है, लेकिन इन नहरों से मात्र 14,122 किमी क्षेत्रफल ही कवर होता है। 347 राजकीय नलकूप लगे है। जिनसे 2361 हेक्टैयर क्षेत्रफल की सिंचाई का दावा किया जाता है , लेकिन अधिकांश नलकूप खराब पड़े हैं। नालियां चोक हैं जिससे किसानों को इसका कोई लाभ नहीं मिल पाता। इसके अलावा लोगों ने अपने निजी नलकूप भी लगवा रखे हैं।
पांच नलकूप की बोरिंग हो चुकी है फेल
कासगंज। जून माह के सूखे चले जाने से भूजल स्तर में तेजी से गिरावट आने लगी है। शहर के सोरों गेट पुलिस चौकी, पुराने एसडीएम कोर्ट सराय, छर्रा रोड बस अड्डा, भीम नगर, सिटी मोहल्ला के नलकूपों की बोरिंग फेल हो चुकी है, जिससे शहर में पेयजल का संकट है।
इन फसलों पर है संकट
फसल लक्ष्य हेक्टेयर में
धान 15 हजार
मक्का 34 हजार
बाजरा 43 हजार
उर्द एक हजार
तिल 500
जिले में दस साल में जून माह में बारिश की स्थिति मिमी में
माह 2010 2011 2012 2013 2014 2015 2016 2017 2018 2019
जून 0 172.73 7.33 232 3.16 173 105 136.33 6.1 0
बारिश न होने से फसल की बुवाई पर असर पड़ रहा है। अगहेती फसलें सूखने के कगार पर हैं। तिरेंद्र कुमार किसान निवासी तवालपुर कासगंज
किसान ने धान की फसल के लिए पौध तैयार कर ली है, लेकिन बारिश न होने से पौध की रोपाई नहीं हो पा रही। देवलाल गुप्ता किसान नरदौली पटियाली
बादल तो अक्सर आसमान में घिर रहे हैं, लेकिन बारिश नहीं हो रही, यदि ऐसे ही हाल रहे तो सूखा पड़ सकता है। भीकम सिंह किसान नरदौली पटियाली
खरीफ की फसल की बुवाई के लिए खेत जोतकर तैयार कर लिए हैं, यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो फसल पिछड़ जाएगी। वीरपाल किसान गंगागढ़ सोरों,
खरीफ की फसल को मानसून की फसल माना जाता है। इस फसल में पानी की अधिक आवश्यकता होती है। यदि किसान अपने संसाधन से पानी लगाता भी है तो फसल की लागत काफी अधिक बढ़ जाती। गर्मी के मौसम की बजह से दो तीन दिन बाद ही खेत से नमी कम होने लगती है। सुमित सिंह जिला कृषि अधिकारी