कासगंज। कृषि विभाग की ओर से किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की गई है। विभाग ने एडवाइजरी में गेहूं और अन्य रबी फसलों में सिंचाई से पहले यूरिया का छिड़काव न करने की सलाह दी है।
जिला कृषि अधिकारी डॉ. अवधेश मिश्र ने बताया कि सिंचाई से पहले यूरिया का छिड़काव करने पर यूरिया पानी में एक से दो मिनट में घुलकर जमीन में एक से डेढ़ मीटर तक नीचे चला जाता है। इससे पौधों को नाइट्रोजन पोषक तत्व नहीं मिल पाता और भूजल प्रदूषित होता है। यूरिया का एक हिस्सा नाइट्रस ऑक्साइड के रूप में वायुमंडल में घुलकर वातावरण को भी प्रदूषित करता है।
कृषि अधिकारी ने किसानों को पहले हल्की सिंचाई करने और ओट आने के बाद ही वैज्ञानिक तरीके से यूरिया का छिड़काव करने की सलाह दी। बताया कि दूसरी सिंचाई के बाद दानेदार यूरिया की टॉप ड्रेसिंग की जगह नैनो यूरिया का छिड़काव करें। इससे फसल अच्छी और उत्पादन बढ़ेगा। साथ ही रोग-कीट की लगने की आशंका नहीं होगी।
यदि फसल में खरपतवार अधिक है तो पहली सिंचाई के चार से पांच दिन बाद खरपतवारनाशक रसायन का छिड़काव करें फिर कम से कम तीन दिन बाद यूरिया दें। यदि गेहूं की फसल में सकरी पत्ती के खरपतवार जैसे गेहूं का मामा या गेहूंसा (फैलरिस माइनर) और जंगली जई आदि हो तो सल्फोसालफ्यूराॅन 75 प्रतिशत डब्लूजी की 33 ग्राम मात्रा 350-400 लीटर पानी और क्लोडिनाफॉप प्रोपार्जील 15 प्रतिशत डब्लूजी की 400 ग्राम मात्रा 500-600 लीटर पानी मे घोलकर बुवाई के 25 दिन बाद एक हेक्टेयर. क्षेत्रफल मे छिड़काव करे।
चौड़ी पत्ती के खरपतवारों जैसे बथुआ, कृष्णनील और जंगली पालक आदि के नियंत्रण हेतु मेट सल्फोसल्फ्यूराॅन मिथाइल 20 प्रतिशत डब्लूपी की 20 ग्राम और कारफेंट्राजॉन इथाइल 40 प्रतिशत डीएफ की 50 ग्राम मात्रा प्रति हेक्टेयर 500 लीटर पानी में घोलकर बुवाई के 25 दिन बाद छिड़काव करें।