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UP: जल निगम के कर्मियों और पेंशनर्स का दर्द, इसलिए मनाया काला दिवस...कार्य बहिष्कार किया

Wed, 10 Sep 2025 09:43 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

जल निगम के कर्मियों और पेंशनर्स ने काला दिवस मनाते हुए कार्य बहिष्कार किया। कर्मचारियों ने श्वेतपत्र जारी कर प्रदेश के सीएम से कैशलेस इलाज की गुहार लगाई है।
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जल निगम संघर्ष समिति - फोटो : संवाद
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विस्तार
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जल निगम के कर्मियों और पेंशनर्स ने जल निगम संघर्ष समिति के बैनरतले मंगलवार को संजय प्लेस स्थित मुख्य अभियंता कार्यालय पर काला दिवस मनाते हुए धरना-प्रदर्शन किया। निगम बनाए जाने का विरोध जताते हुए कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार किया। कर्मचारियों ने श्वेतपत्र जारी कर प्रदेश के सीएम से कैशलेस इलाज की गुहार लगाई है।
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धरने को संबोधित करते हुए संयोजक राजीव अग्रवाल ने कहा कि उप्र जल निगम 1927 से लेकर 1975 तक राजकीय विभाग था। कर्मचारियों का वेतन और पेंशन ट्रेजरी से मिलता था। उस समय कार्यों पर सेंटेज चार्ज 22 प्रतिशत था। जल निगम बनने के बाद वेतन/पेंशन ट्रेजरी से मिलना बंद हो गई। इससे जल निगम को वेतन/पेंशन सहित सभी खर्चे 22 प्रतिशत सेंटेज चार्ज से ही वहन करने पड़ रहे हैं।

कर्मचारी नेता राजीव गोस्वामी ने कहा कि वर्ष 1997 से सेंटेज चार्ज भी 12.5 प्रतिशत कर दिया है। इससे जल निगम की वित्तीय स्थिति खराब हो गई। 9 सितंबर 2021 को जल निगम को नगर और ग्रामीण दो टुकड़ों में बांटने से स्थिति और भी खराब हो गई है। एक निगम में छह माह से वेतन/पेंशन नहीं मिली तो दूसरे निगम में 14 साल के कार्मिक बोनस से वंचित हैं। दोनों निगमों पर वेतन से जीपीएफ की धनराशि काटकर उसे कहीं निवेश न करने का भी आरोप लगाया है।
 

सभा में हरिदेव शर्मा, शपदम सिंह, सुनील शर्मा, वीडी गुप्ता एवं बृजवीर सिंह ने कहा कि जल निगम विभाजन के बाद अब सेंटेज राशि घटाकर मात्र 5 प्रतिशत कर दी गई है। उन्होंने कहा कि जल निगम को सेंटेज रहित घोषित करते हुए कर्मियों/पेंशनर्स का वेतन ट्रेजरी से संबद्ध करने से ही पेयजल और सीवर व्यवस्था को ध्वस्त होने से बचाया जा सकता है।
 
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जल निगम का एकीकरण करने की भी मांग की गई। सभा के अंत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से जल निगम को नौकरशाहों के चंगुल से मुक्त कराने की मांग की गई। जल निगम कर्मियों और उनके परिवारों को भुखमरी से बचाने की अपील की गई। मुख्यमंत्री से शिक्षकों की तरह जल निगम कर्मियों को भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की गुहार लगाई है।
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