आरोपियों ने उसका सिर दीवार में जोर से मार दिया। इसके बाद दरवाजे की चौखट में भी मारा। इससे वो जमीन पर गिर पड़ा। यह देखकर परिवार के लोग आ गए। इस पर आरोपी परिवार भाग गया। उन्होंने मदने को पहले एक डॉक्टर को दिखाया। उसने एसएन मेडिकल कालेज ले जाने को कहा। इस पर वहां ले गए, जहां मदन को मृत घोषित कर दिया गया।
सूचना पर पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। थाना प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि मुकदमा दर्ज कर लिया है। आरोपियों पर कार्रवाई की जा रही है। साईकिल खड़ी करने के विवाद में हत्या का आरोप है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट हो सकेगा।
पीड़ित भाई को ही पुलिस ने किया थाने में बंद
परिजनों का आरोप है कि मृतक का भाई संतोष थाना पर शिकायत करने गया था। यहां पर चाचा का परिवार पहले से बैठा हुआ था। उन्होंने तहरीर भी दे रखी थी। पुलिस ने बिना कुछ सुने उसे पकड़ लिया। इसके बाद कार्यालय में बैठा लिया।
उसने बताया कि भाई की हालत खराब है। इसके बावजूद सिपाही ने कोरे कागज पर कुछ लिखना शुरू कर दिया। इसके बाद कहा कि समझौता करना है तो कर लो, नहीं सुबह शांति भंग में जेल भेज देंगे।
रमेश चंद्र के परिजन भी मारपीट का आरोप लगाने लगे। एक घंटे तक थाने में बैठाकर रखा। बाद में अन्य परिजन आए। उन्होंने मदन की मौत की जानकारी दी। इस पर पुलिसकर्मी ने कागज को फाड़ दिया। तीनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया। बाद में तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया।
परिवार का इकलौता कमाने वाला था मदन
परिजनों ने बताया कि मदन के परिवार में पिता, मां जमुना, भाई संतोष हैं। एक भाई बाहर रहता है। मदन की शादी तीन साल पहले सुमन से हुई थी। उसका एक ढाई साल का बेटा प्रियांशु है। पिता छोटेलाल की लॉक डाउन में जूता फैक्टरी से नौकरी छूट गई थी। अब घर पर ही हैं। संतोष को भी काम नहीं मिल रहा था। मदन ही अकेला परिवार का सहारा था।