डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय ने इस सत्र स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में 33 प्रतिशत सीटें बढ़ाने का निर्णय लिया है। इससे उन विद्यार्थियों को राहत मिली है, जिन्हें कॉलेजों में सीटें भर जाने से प्रवेश नहीं मिल पा रहा था। वहीं, दूसरी ओर सीट वृद्धि में शुल्क नियम की शर्त से महाविद्यालयों के प्राचार्यों में नाराजगी है।
बुधवार को विवि ने 33 प्रतिशत सीट वृद्धि के निर्देश जारी कर दिए। कई महाविद्यालयों की लंबे समय से यह मांग भी थी। मगर यह वृद्धि एक शर्त के साथ लागू की गई है। इसके अनुसार जिस भी महाविद्यालय में पाठ्यक्रम में सीट वृद्धि होगी उस पाठ्यक्रम का 10,000 शुल्क विवि के बैंक में जमा कराना होगा। साथ ही उन बच्चों का ही एडमिशन होगा जिनका समर्थ पर रजिस्ट्रेशन हो चुका है। शुल्क नियम के बारे में प्राचार्यों का कहना है कि यह नियम सही नहीं है। पूर्व में शासन की ओर से 33 प्रतिशत सीट निशुल्क बढ़ी थी।
वहीं, कुलपति प्रो. आशु रानी का कहना है कि इस नियम को लागू करने का उद्देश्य एडमिशन प्रक्रिया में पारदर्शिता और निगरानी रखना है। पूर्व में कई बार सीटें बढ़ाई गईं और अनियमितता पाई गईं। अब जिस भी महाविद्यालय को सीट बढ़वानी है वे शुल्क जमा कर आवेदन करेंगे।