राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत परास्नातक स्तर पर भी सेमेस्टर व्यवस्था के तहत 15 जून से प्रवेश प्रक्रिया चल रही है, जिसके बाद कक्षाएं 22 अगस्त से लगनी थीं। हैरानी की बात तो ये है कि अभी तक पाठ्यक्रम ही तय नहीं हो सका है।
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में स्नातक और परास्नातक प्रथम सेमेस्टर की कक्षाएं 22 अगस्त से लगनी थीं। विश्वविद्यालय प्रशासन परास्नातक प्रथम सेेमेस्टर में पढ़ाए जाने वाले पाठ्यक्रमों को ही अभी तक तय नहीं कर पाया है। प्रवेश प्रक्रिया अभी भी चल रही है, जो कि 15 जून को शुरू हुई थी।
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राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों व संस्थानों में परास्नातक स्तर पर भी सेमेस्टर व्यवस्था लागू कर दी गई है। पाठ्यक्रम का ढांचा तो तैयार कर लिया गया है, पाठ्यक्रम (विषयवस्तु) तय नहीं है। विश्वविद्यालय प्रशासन की ढिलाई की वजह से शैक्षणिक कैलेंडर का पालन संभव नहीं है। कैलेंडर के अनुसार प्रथम सेमेस्टर की मिड टर्म परीक्षाएं 10 से 31 अक्तूबर के बीच कराई जानी हैं। 10 अक्तूबर तक परास्नातक की कक्षाएं भी लग पाना मुश्किल है।
परास्नातक स्तर पर पढ़ाए जाने वाले पाठ्यक्रमों को पहले विश्वविद्यालय के विद्या परिषद और कार्य परिषद में रखा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद ही कॉलेजों को पढ़ाने के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। अभी बोर्ड ऑफ स्टडीज से पाठ्यक्रमों को तैयार कराया जा रहा है। पाठ्यक्रम पढ़ाई के लिए उपलब्ध होने में अभी कुछ समय लगेगा। विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. विनोद कुमार सिंह का कहना है कि पाठ्यक्रम तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है। जल्द पाठ्यक्रम कॉलेजों व संस्थानों को उपलब्ध करा दिए जाएंगे।
स्नातक में भी सत्र के अंत में मिल पाया था पाठ्यक्रम
स्नातक प्रथम सत्र में भी विश्वविद्यालय प्रशासन की ढिलाई का खामियाजा छात्रों को उठाना पड़ा था। सत्र के अंत में व्यावसायिक पाठ्यक्रम तय हो पाया था। पाठ्यक्रम परीक्षा से कुछ दिन पहले कॉलेजों को उपलब्ध कराया गया था।