होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश चौहा ने कहा कि जिस उद्योग से सबसे ज्यादा विदेशी मुद्रा ले रहे थे, कोरोना में जब उस पर गाज मिरी तो वित्तमंत्री दो साल से कुछ बोल ही नहीं रहीं। पर्यटन के लिए इससे बुरा बजट हो ही नहीं सकता। अपनी व्यथा किसे कहें और कौन समझे। ऐसी निराशा कभी किसी बजट को देखकर नहीं हुई।
'लगता है वित्त मंत्री पर्यटन शब्द नहीं जानती'
होटल ऑनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रमेश वाधवा ने कहा कि लगता है कि वित्त मंत्री को पर्यटन शब्द आता ही नहीं, तभी उनके बजट में से आगरा, पर्यटन दोनों गायब हैं। जो पर्यटन उद्यमी कोरोना संक्रमण में अपनी आजीविका चला पा रहे थे, अगले साल तक उनकी संख्या आधी से भी कम रह जाएगी।
कन्फेडरेशन ऑफ टूरिज्म एसोसिएशंस के राजीव तिवारी ने कहा कि होटल, ट्रांसपोर्ट, हस्तशिल्प, ट्रेवल एजेंट। कोई तो ऐसा सेक्टर हो, जिसे कुछ दिया हो, पर पर्यटन उद्योग को पुर्नजीवित करने के लिए कुछ नहीं दिया गया। बेहद निराशजनक बजट है।
आगरा शू मैन्यूफैक्चरर्स एसो. के जितेंद्र त्रिलोकानी ने कहा कि कोरोना संक्रमण ने फुटवियर को जो नुकसान पहुंचाया, उसके लिए वित्तमंत्री से बूस्टर डोज की उम्मीद थी, पर ऐसा कुछ नहीं हुआ। यह डोज केवल निर्यातकों को दी गई, जबकि बड़ी संख्या में घरेलू उत्पादकों की उपेक्षा की गई।
आगरा शू फैक्टर्स फेडरेशन के अध्यक्ष गागन दास रामानी ने कहा कि जीएसटी के प्रावधान बदले, पर दरें नहीं बदली गईं। बजट में नीतिगत फैसला करना चाहिए था, पर फुटवियर के घरेलू उत्पादकों की झोली खाली रही। फुटवियर सस्ते होंगे, केवल यह कहकर गुमराह किया गया है।
आगरा में जूता कारोबार के आंकड़े
65 फीसदी जूते पर आगरा की हिस्सेदारी
27 फीसदी जूता निर्यात आगरा से
04 लाख लोग जूता उद्योग से जुड़े हुए
5000 करोड़ का जूता निर्यात हो रहा
10 हजार करोड़ का घरेलू कारोबार
10 फीसदी आयात शुल्क था चमड़े पर