आगरा। पर्यटन नगरी को 100 करोड़ रुपये के निवेश का झटका लगा है। शहर की प्रतिष्ठित मेडिकल सर्जिकल उपकरण निर्माता कंपनी रोमसंस ने मंगलवार को नए विस्तार के लिए आगरा की बजाय जेवर (नोएडा) को चुना है। लखनऊ में सीएम योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में मंगलवार को फार्मा कॉन्क्लेव में रोमसंस ने जेवर मेडिकल डिवाइस पार्क में नई फैक्टरी लगाने के लिए 100 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं।
निवेश के लिए एमओयू साइन करने पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने रोमसंस कंपनी के मालिक किशोर खन्ना को मंगलवार को लखनऊ में सम्मानित भी किया। हालांकि, आगरा से लगातार निवेश छिटकना चिंताजनक है। रोजगार के अवसर खत्म हो रहे हैं। यहां निवेश की राह में सबसे बड़ा रोड़ा ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) के कड़े नियम हैं। बीते कई वर्षों से नए उद्योगों की स्थापना पर पाबंदियों के कारण निवेशक चाहकर भी यहां निवेश नहीं कर पा रहे हैं।
साल 2021 में सीएम योगी ने आगरा को फार्मास्युटिकल हब बनाने का एलान किया था लेकिन पांच साल बीतने के बाद भी प्रशासन धरातल पर एक एकड़ जमीन भी चिह्नित नहीं कर सका। यदि आगरा में फार्मा का हब बनता तो जेवर की जगह यहीं निवेश होता। इससे पहले आगरा में हुए निवेश प्रस्ताव भी हवा हो चुके हैं। 2022-23 में ग्लोबल इन्वेस्टर समिट में आगरा को करीब तीन लाख करोड़ रुपये निवेश के प्रस्ताव मिले थे लेकिन नियमों की बंदिशों के कारण पिछले तीन सालों में 10 हजार करोड़ का निवेश भी नहीं हो सका।
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जेवर बना पहली पसंद, आगरा पीछे छूटा
किशोर खन्ना ने स्पष्ट किया कि उनकी कंपनी वैश्विक स्तर पर निर्यात करती है। आगरा में जगह न मिलने और सुविधाओं के अभाव के कारण उन्होंने जेवर के पास बन रहे मेडिकल डिवाइस पार्क को चुना है। आगरा में नुनिहाई में उनकी दो इकाइयां संचालित हैं। यहां उद्योगों के विस्तार पर रोक है। रोमसंस से पहले हांगकांग की एक बड़ी कंपनी जो इलेक्ट्रिक व्हीकल और लिथियम बैटरी के दो प्लांट आगरा में लगाना चाहती थी, यहां से खाली हाथ लौट गई। उसे 200 एकड़ जमीन की दरकार थी, जो शासन और प्रशासन उपलब्ध नहीं करा सके। नतीजा यह हुआ कि एक लाख करोड़ (50-50 हजार करोड़ के दो प्लांट) का महानिवेश भी जेवर की झोली में चला गया।
जल्द रास्ता न निकला तो पुराने उद्यमी भी होंगे दूर
लघु उद्योग भारती के प्रदेश मंत्री मनीष अग्रवाल रावी का कहना है कि जेवर में एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट लगभग तैयार है। वहां का इंफ्रास्ट्रक्चर निवेशकों को आकर्षित कर रहा है। वहीं, आगरा अपनी ऐतिहासिक विरासत और पर्यावरण नियमों के बीच फंसकर रह गया है। यदि जल्द ही भूमि अधिग्रहण और टीटीजेड नियमों के बीच का रास्ता नहीं निकाला गया तो ताजनगरी के पुराने उद्यमी भी अपना रुख अन्य शहरों की ओर करने को मजबूर होंगे।