ताजनगरी की हवा पहले से खतरनाक है, प्रदूषण इतना बढ़ चुका है कि लोगों को सांस लेने में तकलीफ हो रही है, ऐसे में पटाखे फोड़कर और जहर न घोलें... यह अपील है छात्र-छात्राओं की। अमर उजाला की पहल एक युद्ध-पटाखों के विरुद्ध के तहत बुधवार को आयोजित वेबिनार में छात्र-छात्राओं ने कहा कि दिवाली पर खुशियां बांटे, पटाखों के पैसे से गरीबों की मदद करें, उनके घर को भी रोशन करें।
वेबिनार में वक्ताओं ने कहा कि हर साल ताजनगरी में ही 15 से 18 करोड़ रुपये पटाखों पर फूंक दिए जाते हैं। इससे सिर्फ प्रदूषण बढ़ता है। दिवाली के अगले दिन अस्पतालों में सांस रोगियों की भीड़ उमड़ती है। पिछले दस सालों में पटाखों में धमाकों से 20 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है।
'पैसे की बर्बादी है पटाखे फोड़ना'
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के शोधार्थी दीप कुमार गर्ग ने कहा कि पटाखे फोड़ना एक तरह की धन की बर्बादी है। इस दिवाली लोगों को गरीबों की मदद करनी चाहिए। इससे उन्हें खुशी मिलेगी। दीपक जलाकर घर को रोशन करें।
खुशियां बांटकर मनाएं दिवाली
आरबीएस कॉलेज में बीएससी तृतीय वर्ष की छात्रा आमरीन ने कहा कि कोरोना की वजह से तमाम लोग बेरोजगार हो गए हैं। दिवाली खुशियां बांटने का त्योहार है। लोगों को गरीबों के घर में मिठाई बांटकर त्योहार मनाना चाहिए। अमर उजाला का अभियान सराहनीय है।
खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है प्रदूषण
सेंट जोंस कॉलेज में बीकॉम द्वितीय वर्ष के छात्र अनुराग गुप्ता ने कहा कि पटाखों का धुआं हवा में जहर घोल देता है। कोरोना संक्रमित होने के बाद जो लोग ठीक हो गए हैं, उनके लिए प्रदूषण बढ़ना खतरनाक हो सकता है। पशु-पक्षियों के लिए भी परेशानी बढ़ जाती है।
'लोगों को पटाखों के दुष्परिणाम बताऊंगा'
कृष्णा कॉलेज में बीएससी तृतीय वर्ष के छात्र शिवम राजपूत ने कहा कि पटाखे जलाना खतरनाक होता है। एनएसएस के स्वयंसेवक के तौर पर लोगों को दिवाली पर पटाखों से दूरी बनाने के लिए जागरूक करूंगा। इसके दुष्परिणाम से अवगत कराया जाएगा।
खुद की खुशी के लिए दूसरों को दुख न दें
सेंट जोंस कॉलेज में बीकॉम तृतीय वर्ष की छात्रा प्रत्याशा ने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवक के तौर पर हमारा काम है लोगों को जागरूक करना और हम करेंगे भी। लोगों को समझाया जाएगा कि खुद की खुशी के लिए दूसरों को दुख न दें। दिवाली पर दीपक जलाकर खुशी मनाएं।