आगरा में दो मई को आए तूफान ने ऐसी तबाही मचाई, जिसके निशान आज भी बाकी है। खेरागढ़ की छह साल की मानवी के लिए बुधवार की रात किसी कहर से कम नहीं थी। वो आज अस्पताल में दर्द से कराह रही है।
उसकी मां प्रवेश कुमारी पहले ही आत्महत्या कर चुकी है, दहेज हत्या में पिता श्याम अवतार जेल में है। चार साल को छोटा भाई अर्चित हादसे में पहने ही जान गवां चुका है। तूफान में दादा राजवीर और दादी भी घायल हैं।
ऐसे में मान्वी का अब सहारा नाना मुन्नालाल और नानी शशि ही एकमात्र सहारा हैं। मासूम की चोट देख नानी कहती हैं कि अब यही हमारी बच्ची है, इसका लालन-पालन हम ही करेंगे।
मासूम मानवी ही नहीं एसएन अस्पताल में कई बच्चे दर्द से कराह रहे हैं। उनके मां-बाप भी घायल हैं। वे आज भी उस रात को याद कर सहम जाते हैं। भगवान से दुआ करते हैं, कुदरत ऐसा कहर फिर कभी बरपाए।