हर सांस में घुल रही जहरीली हवा लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल रही है। वहीं संगमरमरी ताजमहल को भी बदरंग करने लगी है। डेढ़ साल से ताजमहल के पीलेपन को दूर करने के लिए चलाये जा रहे मडपैक ट्रीटमेंट के बाद स्मॉग ने सप्ताहभर में ही ताज की चमक फीकी कर दी है।
धूल और प्रदूषक तत्वों की मोटी परत ताजमहल पर जमा हो गई है, जिससे ताज मडपैक से पूर्व की तरह जल्द ही पीला नजर आने लगेगा। अगर जल्द ही बारिश न हुई तो ताज पर प्रदूषण का गहरा असर दिखाई देने लगेगा।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एयर क्वालिटी इंडेक्स ने आगरा में 449 का खतरनाक आंकड़ा छू लिया है। ताजमहल पर तीन दिनों से बेहद बारीक कणों पर्टिकुलेट मैटर (पीएम-2.5) की मात्रा क्रमश: 373, 407 और 428 रही है।
सामान्य तौर पर पीएम 2.5 कणों की मात्रा 60 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक होनी चाहिए, लेकिन यह आठ गुना तक ज्यादा है। संजय प्लेस में यह 500 के भी पार पहुंच गई है।
रंग-रूप दोनों पर असर
ताजमहल पर धुंध
- फोटो : अमर उजाला
ताजमहल पर धूल कणों की भारी मात्रा मुख्य गुंबद पर जमा हो रही है। वहीं हाल में ही चमकाई गई मीनारों, आर्च और मुख्य गुंबद की दीवारों पर धूल कणों के साथ कार्बन के कण भी एकत्र हो रहे हैं।
स्मॉग की मोटी चादर के बीच एएसआई ने शाही मस्जिद और यमुना किनारा की ओर मडपैक का काम शुरू करा दिया है। मस्जिद की ओर आधी दीवारें और आर्च पीली पड़ी हुई थीं, जिन्हें डाक्यूमेंटेशन के लिए छोड़ा गया था। यमुना किनारा पर कीड़ों के कारण लगे हरे-काले दाग अब छुड़ाए जा रहे हैं।
अधीक्षण पुरातत्व रसायनविद डा. एमके भटनागर ने बताया कि ताजमहल के संगमरमर पर धूल के कणों और प्रदूषक तत्वों की मात्रा जमा होने से इसके रंग पर तो असर पड़ेगा ही, कणों के टकराने से क्षरण भी होगा। बारिश न होने पर धूल मिट्टी ताज पर जमा हो जाएगी जो इसे नुकसान पहुंचाती है।