आगरा के उद्यमी पूरन डावर, कैप्टन अजीत राणा, उपेंद्र सिंह (क्रमश:)
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आगरा फुटवियर मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स चैंबर (एफमैक) के अध्यक्ष पूरन डावर का कहना है कि कोरोना काल में खासकर निर्यात इकाइयों के सामने परेशानी आई है। अब इसे प्रोत्साहित करने के लिए पैकेज की आवश्यकता है। जूता उद्यमी फिर से खड़े होकर उद्योग को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकते हैं लेकिन इसके लिए कर्ज की दरें कम की जानीं जरूरी है। बांग्लादेश और चीन में सस्ती दरों पर कर्ज दिया जा रहा है। इनसे प्रतिस्पर्धा है, इसलिए जरूरी है कि कर्ज की दरें समान हों।
उन्होंने कहा कि दूसरा कदम यह उठाया जाए कि इस इंडस्ट्री में निवेश करने वाले को सरकार इंसेटिव (प्रोत्साहन) दे। इससे दो फायदे होंगे। एक तो इस इंडस्ट्री का पैसा इसी के विस्तार पर लगेगा। दूसरा अन्य लोग भी प्रेरित होंगे। तीसरी आवश्यकता है सामाजिक सुरक्षा। टैक्स स्लैब भले ही ज्यादा हों लेकिन जो टैक्स जूता उद्योग से मिल रहा है, उसका एक हिस्सा उद्यमियों को स्वास्थ्य बीमा जैसी सुविधाएं देने पर खर्च किया जाए।
'पैकेज की शर्तें आसान हों'
एफमैक के उपाध्यक्ष गोपाल गुप्ता ने कहा कि पिछले साल जो पैकेज मिला था, उसकी शर्तें कठिन थीं। सभी उद्यमी उसका लाभ नहीं उठा पाए। इस बार शर्तें आसान रखी जाएं ताकि पूरी इंडस्ट्री को राहत मिले।
'राहत का टॉनिक चाहिए'
जूता निर्यातक कैप्टन अजीत राणा ने कहा कि जूता इंडस्ट्री इस समय बीमार पड़ी है, इसे राहत का टॉनिक चाहिए। यह ऐसा होना चाहिए जिससे न केवल पूंजी मिले बल्कि निर्यात को बढ़ावा भी।