आगरा के थाना शाहगंज के दहेज हत्या के एक मामले में सात गवाहों के मुकर जाने पर भी हत्यारों को सजा मिली। इसका कारण यह रहा कि कोर्ट ने फोरेंसिक साक्ष्यों को महत्व दिया।
इसके चलते गवाहों का पलट जाना दोषियों के खिलाफ ही गया। घटना छह मई 2016 की है। बारह बीघा, मरघटी, नरीपुरा निवासी जगवीर सिंह की बेटी पूजा ने मोहल्ले के संतोष से प्रेम विवाह किया था।
ससुरालियों ने शादी के तीन साल बाद पूजा पर मिट्टी का तेल डालकर जला दिया। वह 98 फीसदी तक जल गई। उसकी सात जून 2016 को उसकी मौत हो गई थी।
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मृतका के पिता जगवीर ने पति संतोष, ससुर पोकीराम, सास राजो देवी, जेठ माता प्रसाद, दामोदर, जिठानी पुष्पा देवी, सुनीता और ननद संतोष कुमारी निवासी अजमेर (राजस्थान) के खिलाफ दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज कराया।
इसमें आरोप लगाया कि ससुराली 50 गज का प्लाट और दो लाख रुपये की मांग कर रहे थे। इसलिए उसकी हत्या कर दी। कोर्ट में वादी जगवीर, उसकी पत्नी और बेटों सहित सात गवाह पेश किए गए।
सभी अपने बयान से मुकर गए। उन्होंने कहा कि पूजा की हत्या ससुरालियों ने नहीं की है। पूजा की मौत खाना बनाते समय चूल्हे की आग से जलने से हुई है।
ऐसे हुई पुष्टि
एडीजीसी विमलेश आनंद ने कोर्ट में साक्ष्य के तौर पर विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट को प्रस्तुत किया। इसमें पूजा की मौत मिट्टी के तेल से लगी आग से होने की पुष्टि हुई।
इस केस के विवेचक भी गवाह के रूप में प्रस्तुत किए। उन्होंने मिट्टी का तेल डालकर हत्या करने के बारे में कहा। बचाव पक्ष की यह दलील कि मृतका की खाना बनाते समय चूल्हे की आग से जलने से मृत्यु हुई काम नहीं आई।
अपर जिला जज (द्वितीय) अनिल कुमार अपने निर्णय में केवल अजमेर निवासी ननद संतोषी उर्फ संतोष कुमारी को घटना के समय अपनी ससुराल में पाते हुए उसे बरी कर दिया। शेष पूरे परिवार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।