सींगना में बन रहे अंतरराष्ट्रीय आलू अनुसंधान केंद्र के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र में शकरकंद की नौ किस्मों का ट्रायल शुरू किया गया है। सफलता मिलने पर किसानों को आलू से पहले एक अतिरिक्त फसल का विकल्प मिलेगा, जिससे उनकी आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
अंतरराष्ट्रीय आलू अनुसंधान केंद्र (सीआईपी) के सींगना में बन रहे दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र (सी-सार्क) में वैज्ञानिकों ने शकरकंद (स्वीट पोटैटो) की किस्मों पर शोध शुरू कर दिए हैं। इससे आलू के साथ शकरकंद की प्रदेशभर के किसानों खेती कर सकें। अच्छी किस्मों से किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। आगरा और उत्तर प्रदेश आलू की तरह शकरकंद का हब बन सकेगा। यहां की मिट्टी और वातावरण में इनके विकास की गति से वैज्ञानिकों को प्रयोगों के सफल होने की पूरी उम्मीद है।
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सींगना में बन रहे अनुसंधान केंद्र निर्माण और उसमें शोध के संबंध में मंगलवार को शाहजहां गार्डन स्थित सी-सार्क कार्यालय पर सीआईपी के पदाधिकारियों की बैठक हुई। इसमें सीआईपी महानिदेशक सिमोन हेक, सीआईपी-चाइना सेंटर फॉर एशिया पैसिफिक निदेशक यानमिन शी, अफ्रीका सीआईपी क्षेत्रीय निदेशक जॉयस, लैटिन अमेरिका सीआईपी क्षेत्रीय निदेशक वियन पोलर और सीसार्क निदेशक डॉ. सुधांशु सिंह शामिल हुए।
उन्होंने आलू के साथ शकरकंद की भारत की किस्मों के साथ वियतनाम, अफ्रीका, चीन और बांग्लादेश की अच्छी किस्मों को यहां के वातावरण में विकसित करने और यहां के किसानों के लिए उपयोगी बनाने की योजनाओं पर चर्चा की। इससे पहले सींगना के निर्माणाधीन अनुसंधान केंद्र और वहां शकरकंद की लगी किस्मों का निरीक्षण किया। निदेशक डॉ. सुधांशु सिंह ने बताया कि सींगना में खरीफ की नौ शकरकंद की किस्मों का ट्रायल लगाया गया है।
इनमें बैंगनी, नारंगी और सफेद गूदे वाली हैं, इसके साथ ही एक सफेद गूदा और लाल छिलका वाली है। अधिकतर का आकार अंडाकार है। ये सभी किस्में विटामिन से भरपूर हैं। इनके सफल होने से जल्द शकरकंद के क्षेत्र में कार्य करने वाली संस्थाओं के साथ मिलकर इन्हें किसानों तक पहुंचाया जाएगा। इससे सबसे ज्यादा फायदा आगरा के किसानों को होगा। क्योंकि यहां आलू की खेती करने वाले 60 फीसदी से अधिक किसान साल में केवल एक आलू की फसल ही ही पैदावार करते हैं। उन्हें वर्षा के पानी से होने वाली और आलू की फसल से पहले एक और एक फसल करने को मिल जाएगी।
इन किस्मों के लगे हैं ट्रायल
1- भू- अरुणिमा, भू-कृष्ण, भू-सोना, कमला सुंदरी, एसपी 94/4, कंचनगढ़, कृष्णा, कोरापुट लैंडरेस (लाल छिलका) और कोरापुट लैंडरेस ( सफेद छिलका)।
छह माह में तैयार हो जाएगा अंतरराष्ट्रीय आलू अनुसंधान केंद्र
निदेशक डॉ. सुधांशु सिंह ने बताया कि सींगना में अनुसंधान केंद्र के निर्माण का कार्य बहुत ही तेजी से चल रहा है। इसके अगले छह माह में पूरी होने की उम्मीद है। यहां जल्द ही आलू की विभिन्न किस्मों पर शोध होंगे। इसके साथ ही किसानों को ट्रेनिंग और कार्यशालाओं से प्रशिक्षण दिए जाएंगे। इस केंद्र से प्रदेश और देश के किसानों के साथ दक्षिण एशिया के देशों के किसानों को लाभ मिलेगा।