आगरा में दलित उत्पीड़न, मारपीट और धमकाने के मामले में डावली, मलपुरा निवासी भोला को घटना के 18 साल बाद दोषी पाते हुए विशेष न्यायालय एससी-एसटी एक्ट शिव कुमार ने सश्रम उम्रकैद के साथ 25 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुना दी। वहीं, साक्ष्य के अभाव में हत्या की कोशिश व अन्य सभी आरोपों से प्रेम सिंह, भूपेंद्र, बंटू और दर्शन को दोष मुक्त कर दिया। अभियुक्त बाबू की मुकदमे के दौरान मौत हो गई।
घटना वर्ष 2008 की है। डावली निवासी करकल्ली ने थाना मलपुरा में तहरीर देकर आरोप लगाया था कि गांव के कुछ लोग प्रधानी के चुनाव से रंजिश मानते थे। 29 अप्रैल 2008 को गांव का निवासी भोला, प्रेम सिंह, भूपेंद्र, बंटू और दर्शन हाथों में लाठी, डंडे और तमंचे लेकर गांव से भगाने के लिए मोहल्ले में आ गए। गाली-गलौज करने लगे।
विरोध पर फायरिंग कर भजनी, फूली, अमर और मान सिंह के घर में आग लगा दी। इससे घर के अंदर रखे सामान के साथ चार भैंस भी जलकर मर गईं। अमर सिंह की पत्नी राजो भी जल गई। डर की वजह से वह परिजन सहित गांव छोड़कर चले गए। पुलिस ने विवेचना के बाद सभी के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया था।