25 जून 1975 की वो काली रात, जिसे उस दौर के लोग याद करते हुए आज भी सिहर जाते हैं। यह वो रात थी, जब देश में आपताकाल लगा। उस दौरान आगरा के कई लोग जेल गए, यातनाएं सहीं। प्रताड़ना की पराकाष्ठा झेल चुके इनमें से बहुत से लोग अब उस दौर को याद तक नहीं करना चाहते।
जिले में 153 लोकतंत्र सेनानी हैं। आपातकाल में ये न सिर्फ जेल में रहे बल्कि वहां अमानवीय यातमनाएं तक सहीं। पुलिस से डरकर बहुत से लोग अज्ञातवास पर चले गए। न सरकर के खिलाफ कुछ बोल सकते और न ही प्रचार कर सकते थे।
शहर में रावतपाड़ा, किनारी बाजार, दरेसी आदि क्षेत्रों में आपातकाल के खिलाफ बगावत के सुर उठते थे। यहां इसके विरोध में लोग संगठित होकर बैठकें करते थे। गुप्तचरों की सूचना के बाद जब तक पुलिस यहां पहुंचती थी, तब तक ये लोग तितर बितर हो जाते थे। फिर भी बहुत से लोग पुलिस के हत्थे चढ़े।