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Agra: 'ओडीओपी' से चमक रहा आगरा का लेदर, अब तक 96 लाभार्थी ले चुके हैं योजना का लाभ

Sat, 19 Nov 2022 03:48 PM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, आगरा

सार

ओडीओपी योजना का वित्तीय वर्ष 2022-23 में अब तक 96 लाभार्थियों का फायदा ले चुके हैं। इन ओडीओपी कारीगरों, इकाइयों को 5.12 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी सब्सिडी प्रदान की जा रही है।  
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लेदर के जूते बनाता कारीगर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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एक जनपद एक उत्पाद यानी ओडीओपी योजना से आगरा के लेदर उत्पाद को वैश्विक (ग्लोबल) पहचान मिलने लगी है। कुटीर उद्योग अब कारखाने का रूप लेने लगे हैं। वित्तीय वर्ष 2022-23 में अब तक 96 लाभार्थी योजना से लाभान्वित हो चुके हैं। 

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आगरा मंडल के संयुक्त आयुक्त उद्योग अनुज कुमार ने बताया कि प्रदेश सरकार ने ओडीओपी योजना वर्ष 2018 में शुरू की थी। आगरा में चमड़ा उत्पाद और मार्बल उत्पादों को ओडीओपी योजना में शामिल किया गया है। यह योजना सभी ओडीओपी के उत्पाद से जुड़े कारीगरों और निर्माताओं के लिए खुली है। 

जिला उद्यम कार्यालयों के माध्यम से संबंधित ओडीओपी उत्पाद कारीगर और निर्माताओं को योजनाओं से जोड़ा जाता है। आगरा का चमड़ा उद्योग यहां के सबसे पारंपरिक और मूल उद्योगों में से एक है। नए और पुराने उद्योगों के लिए दो करोड़ रुपये तक का ऋण बैंक के माध्यम से उपलब्ध कराया जाता है।

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96 लाभार्थी ले चुके हैं योजना का लाभ 

ओडीओपी योजना का वित्तीय वर्ष 2022-23 में अब तक 96 लाभार्थियों का फायदा ले चुके हैं। इन ओडीओपी कारीगरों, इकाइयों को 5.12 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी सब्सिडी प्रदान की जा रही। उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए नई तकनीकी का प्रयोग करते हुए कारीगरों को ट्रेनिंग भी दी जाती है। इससे वह मार्केट में मौजूद उनसे मिलते-जुलते उत्पाद की बराबरी कर सकें। 

बदल गई लाभार्थियों की किस्मत

जिले में कई ऐसे लोग हैं, जिन्होंने अपनी इंडस्ट्री लगाकर खास पहचान बनाई है। इसमें आगरा शहर के अजीता नगला क्षेत्र के रहने वाले गजेंद्र पिप्पल हैं। गजेंद्र ने बताया कि वह अपने जूता उद्योग को बढ़ाना चाहते थे। जिला उद्योग केंद्र के माध्यम से उन्हें 2019 में ओडीओपी योजना का जानकारी मिली। उन्हें 25 लाख रुपये का बैंक से ऋण मिला, जिसे उन्होंने अपने जूता उद्योग में लगाया। दो साल में ही व्यापार में 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई। 

सालाना टर्नओवर करीब 80 लाख था, जो अब बढ़कर 1.5 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। कारखाने में पहले 15 कारीगर थे अब 40 काम कर रहे हैं। करीब 25 लोगों को सीधे तौर पर रोजगार भी मिला। उनके जूते की देश के विभिन्न शहरों में मांग है। इसके साथ ही ऑनलाइन मार्केटिंग साइट्स पर भी उपलब्ध है। वह दूसरे कई लोगों को स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर आत्मनिर्भर बनाने का सराहनीय काम भी कर रहे हैं। 
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