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अंतरिक्ष से लौटने पर ‘गगनयान’ में क्रू मॉड्यूल को लाएंगे एडीआरडीई के पैराशूट

Sun, 30 Dec 2018 01:11 PM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
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एडीआरडीई के पैराशूट
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आगरा की हवाई वितरण अनुसंधान एवं विकास संस्थापन (एडीआरडीई) लैब देश के पहले अंतरिक्ष मानव मिशन में अपना योगदान देगी। वर्ष 2022 में अंतरिक्ष मानव मिशन ‘गगनयान’ के क्रू मॉड्यूल की वापसी और रिकवरी सिस्टम में आगरा के एडीआरडीई के पैराशूट उपयोग होंगे। 
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इसरो के महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ का हिस्सा बनने का गौरव आगरा की हवाई वितरण अनुसंधान एवं विकास संस्थापन (एडीआरडीई) लैब को मिला है, जिसके पास पैराशूट सिस्टम की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। लैब के वैज्ञानिक इससे पहले चंद्रयान और मंगलयान में अपनी विशेषज्ञता दिखा चुके हैं।

अंतरिक्ष मानव मिशन में अंतरिक्ष से धरती की कक्षा में प्रवेश के बाद तीन सदस्यीय क्रू मॉड्यूल को पानी या जमीन पर एडीआरडीई के बनाए पैराशूट ही लेकर आएंगे। किसी भी दुर्घटना की स्थिति में क्रू एस्केप सिस्टम अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित रखेगा। 
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रिकवरी सिस्टम में होंगे छह पैराशूट

12.5 टन वजनी क्रू मॉड्यूल का परीक्षण पांच जुलाई को श्री हरिकोटा में हो भी चुका है। पूरी तरह से स्वदेशी रिकवरी सिस्टम में 6 पैराशूट होंगे। 31 मीटर व्यास के आखिरी पैराशूट क्रू मॉड्यूल को नीचे लेकर आएंगे।

एडीआरडीई के निदेशक एके सक्सेना और उनकी टीम के वैज्ञानिकों में गगनयान मिशन का हिस्सा बनने को लेकर बेहद खुशी है। लैब के वैज्ञानिक इस गौरवशाली इतिहास को सुनहरे पन्नों में लिखने के लिए तैयारी कर चुके हैं।

चंद्रयान, मंगलयान में भी एडीआरडीई के पैराशूट सिस्टम

इससे पहले इसरो ने चंद्रयान और मंगलयान में भी एडीआरडीई के पैराशूट सिस्टम का उपयोग किया है। मंगलयान में एडीआरडीई के पैराशूट सिस्टम से रोवर को मंगल की सतह पर उतारा गया था। भारत दुनिया का चौथा ऐसा देश हो जाएगा, जो स्वदेशी रिकवरी सिस्टम को तैयार कर चुका है। 2007 से एडीआरडीई इसरो के कई अभियानों का हिस्सा बना हुआ है। 
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