वाहनों की तेज गति जानलेवा साबित हो रही है। एमजी रोड से नेशनल हाईवे और एक्सप्रेस-वे पर निर्धारित गति सीमा से अधिक पर वाहन दौड़ते हैं।
इससे हादसे हो रहे हैं। लोग अगर, निर्धारित गति से वाहन चलाएं तो न सिर्फ हादसों पर रोक लगेगी बल्कि जीवन भी सुरक्षित रहेगा।
हाल में हुए एक सर्वे में पाया कि उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा हादसे ओवर स्पीड की वजह से हुए। नेशनल हाईवे-टू (सिक्स लेन) पर वाहनों के लिए गति निर्धारित है।
भारी वाहन 60 किलोमीटर और हल्के वाहन 90 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलाए जा सकते हैं। वह नेशनल हाईवे-टू (फोर लेन) पर भारी और हल्के वाहनों की गति 40 और 60 किलोमीटर प्रति घंटा होनी चाहिए।
वहीं यमुना और लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर वाहनों की गति सीमा भारी वाहनों के लिए 60 किमी और हल्के वाहनों के लिए 100 किमी प्रति घंटा निर्धारित है।
आगरा शहर में वाहनों की रफ्तार 40 किमी प्रति घंटा से अधिक नहीं होनी चाहिए। इसके बावजूद गति सीमा का कोई पालन नहीं कर रहा है। इस वजह से हादसे हो रहे हैं।
आगरा में ट्रैफिक पुलिस के पास स्पीड रडार तक नहीं है, जिससे वाहनों की स्पीड मापी जा सके। एक वाहन काफी पुराना है। मगर, उस पर मशीन खराब हो चुकी हैं।
एमजी रोड पर 40 किमी है निर्धारित गति
यमुना और लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर स्पीड के लिए विशेष कैमरे लगे हैं। एक्सप्रेस-वे पर ट्रैफिक पुलिसकर्मी की ड्यूटी रहती है। वाहनों के निर्धारित गति से अधिक पर वाहन चलाने पर चालान काटे जाते हैं। आरटीओ की ओर से भी नोटिस भेजा जाता है।
एमजी रोड पर 40 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से वाहन चलाए जा सकते हैं। मगर, लोग इससे अधिक गति पर वाहन चलाते हैं। इसकी एक वजह चेतावनी वाले बोर्ड के नहीं लगा होना भी है।