आगरा में पुलिस की करतूत से एक बेकसूर किसान को सजा भुगतनी पड़ी। उसने न कोई जुर्म किया, न उसके खिलाफ कोई केस दर्ज है और न ही उसके वारंट हुए थे। उसे 14 दिन की जेल सिर्फ और सिर्फ पुलिस की नासमझी की वजह से काटनी पड़ी।
पुलिस ने उसे उसी के नाम के हत्यारोपी की जगह जेल भेज दिया था। जब उसके परिजन असली हत्यारोपी को ढूंढ लाए और पुलिस की किरकिरी हुई, तब उसकी रिहाई कराई गई है। पुलिस ने जेल के सामने सारे तथ्य रखे। इस पर उसे रिहा कर दिया गया।
थाना निबोहरा क्षेत्र के मढ़ैया हरलाल निवासी वीरी सिंह के बेटे महेश चंद की मंगलवार को जेल से रिहाई हो गई। एसपी पूर्वी नित्यानंद राय ने बताया कि नए तथ्यों के आधार पर महेश की रिहाई कराई गई है। असली हत्यारोपी के वारंट बन गए है। उसे कोर्ट के सामने पेश किया जाएगा।
दरअसल, कोर्ट से वारंट जारी हुआ था। इस पर नाम जरूर महेश लिखा था, लेकिन उसके पिता का नाम हरि सिंह था और गांव पुरा लालपुर। लेकिन पुलिस ने 29 अगस्त को उसकी जगह मढ़ैया हरलाल निवासी महेश चंद को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
हत्यारोपी बन चुका है बाबा
वारंटी महेश पुत्र हरि सिंह ने बताया कि वो जमानत पर छूटने के बाद कुछ तारीखों पर गया था। बाद में बाबा बन गया। टूंडला थाना क्षेत्र में गांव कुर्ररा के पास यमुना किनारे बने मंदिर पर रह रहा था।
पहचान छिपाने के लिए अपने हाथ पर लिखे नाम को मिटाकर उसकी जगह बाबा लिखवा लिया था। उधर, उसका वारंट जारी हो गया था। इसे तामील कराने के लिए पुलिस ने बेकसूर को गिरफ्तार कर लिया था।
सच को स्वीकार नहीं कर रही थी पुलिस
थाना पुलिस यह मानने के लिए तैयार नहीं थी कि उससे इतनी बड़ी गलती हुई है, जिससे एक इंसान की जिंदगी तबाह हो जाए। जब बेकसूर किसान के
परिजन असली हत्यारोपी को ले आए, तब एसएसपी अमित पाठक ने जांच कराई। इसके बाद सच सामने आ गया तो पुलिस को गलती माननी पड़ी। अब
थाना पुलिस पर गाज गिर सकती है।