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अपराध पर योगी सरकार सख्त, पुलिस मस्त, हैरान कर देने वाला है 'लापरवाही' का आंकड़ा

Sat, 05 Oct 2019 10:18 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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एक तरफ जहां प्रदेश की योगी सरकार अपराध पर अंकुश लगाने के लिए सख्त रुख अपनाए हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ पुलिस ही अपराध के खिलाफ गंभीर नहीं है। आगरा जिले में ऐसे 4600 मामले हैं, जिनकी जांच पूरी नहीं हो पा रही है।

 

इनमें दहेज हत्या, दुष्कर्म और हत्या जैसे संगीन अपराध भी हैं। पुलिस की लेटलतीफी का आलम यह है कि 2015 में दर्ज मुकदमों की जांच भी अब तक चल रही है। एसएसपी ने पुराने मामलों को निपटाने का अभियान चलाया। इसके बाद भी यह हाल है।

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केस- 1: साल भर बाद भी जूडा के बवाल की जांच अधूरी  

17 सितंबर 2018 को घटना हुई थी। देहली गेट पर रोस्तरां में तोड़फोड़ हुई, पुलिस से बदसलूकी की गई। एसएन मेडिकल कॉलेज के 15 जूनियर डॉक्टर जेल भेजे गए। उनकी जमानत हो गई। जांच अभी तक अधूरी है। अज्ञात बताए गए आरोपियों की पहचान तक हरीपर्वत पुलिस ने नहीं की है।

केस-2: वकील पर थाने के सामने हमले की जांच फिर से  

घटना 13 सितंबर 2018 को हुई थी। न्यू आगरा थाने के सामने अधिवक्ता आशुतोष श्रोत्रीय को गोली मारी गई थी। आरोपी जेल गए। उनकी ओर से भी आरोप लगाए गए। पुलिस ने आशुतोष पर हमले में एक आरोपी का नाम निकाल दिया। आशुतोष ने शिकायत की। इस पर नए सिरे से जांच हो रही है।
 
तीन तलाक में एक भी चार्जशीट नहीं
 
जनपद में तीन तलाक का पहला केस मलपुरा थाने में 12 जून को दर्ज किया गया। यह आगरा जोन का पहला केस था। आरोपी शौहर जुकरू रहमान जेल चला गया, लेकिन अब तक इस मामले में चार्जशीट दाखिल नहीं हो पाई है। इसके बाद 10 और मामले दर्ज हो चुके हैं। इनमें से किसी की भी जांच पूरी नहीं की गई है।

50 मुकदमे हत्या के 2015 से 2018 के जिनकी जांच लंबित
43 केस दहेज हत्या के, इनमें सात 2018 के, जांच अधूरी है
47 मामले दुष्कर्म के लंबित, आठ को एक साल से ज्यादा हो गया
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चार्जशीट में देरी से मुल्जिम का फायदा

वरिष्ठ अधिवक्ता मान सिंह चौहान कहते हैं कि यदि आरोपी जेल में है और पुलिस 90 दिन में चार्जशीट पेश नहीं कर पाई तो उसका फायदा है। उसे जमानत मिल सकती है। तीन महीने से ज्यादा में तैयार आरोप पत्र को टाइम बार्ड (समय पूरा होने के बाद का) कहा जाता है। इसका अर्थ होता है कि तय समय में पुलिस आरोपी के खिलाफ साक्ष्य पेश नहीं कर पाई।
 
'सभी दरोगाओं को लक्ष्य दिया गया है'
सवाल : लंबित विवेचनाओं को पूरा करने के लिए क्या किया जा रहा है ?
जवाब : सभी दरोगाओं को लक्ष्य दिया गया है। हर सप्ताह समीक्षा की जा रही है। 
सवाल : जो दरोगा लक्ष्य पूरा नहीं कर रहे हैं, उन पर क्या एक्शन होगा? 
जवाब : उनके खिलाफ प्राथमिक जांच होगी, इसकी रिपोर्ट पर कार्रवाई होगी। 
सवाल : अब तक किसी के खिलाफ कोई एक्शन लिया गया है क्या? 
जवाब : हां, प्राथमिक जांच के आदेश हुए हैं, रिपोर्ट आने पर कार्रवाई भी होगी। 
बबलू कुमार, एसएसपी, आगरा
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