पुलिस का कहना है कि किराए की कोख के सौदे के पीछे एक नेटवर्क काम कर रहा है। बच्चों को चार से पांच लाख रुपये में बेचा जाता है। इसके लिए फोन पर ही एजेंट संपर्क करते हैं। पैदा होने के बाद बच्चों की फोटो दंपती को दिखाई जाती है। कार का एक चालक दिल्ली के हरी नगर का है। उसकी कार में दूसरा उसका दोस्त था। वह गोरखपुर का ही रहने वाला है।
चालक बोला, मुझे गिरोह की जानकारी नहीं
एक चालक ने बताया कि उसे फरीदाबाद के एक परिचित युवक ने कॉल करके गोरखपुर के लिए कार बुक की थी। वह अपने दोस्त को लेकर आया। वह गोरखपुर का रहने वाला है। उन्हें फरीदाबाद के सेक्टर 31 में धीर नगर में बुलाया। 8.45 बजे वह पहुंचा।
उन्हें बताया गया था कि सड़क पर ही गाड़ी खड़ी करना। वहां एक महिला आएगी। उसे गोरखपुर तक छोड़ना है। वह किस घर से आई और कहां से? यह उसे नहीं पता है। दो नवजातों को लेकर जा रही दूसरी महिला की कार फरीदाबाद का युवक चला रहा था। यह कार महिला की ही थी।
पूछताछ में पहले महिलाएं बच्चे अपने बता रही थीं। बाद में पुलिस की सख्ती पर सच्चाई उगल दी। पुलिस अब गैंग के अन्य सदस्यों के बारे में पड़ताल में लगी है। यह भी पता किया जा रहा है कि ये लोग बच्चों को चोरी करके तो नहीं लाए हैं ? कहीं किसी सेंटर से भी बच्चे लाए जा सकते हैं। इन सभी बिंदुओं पर जांच की जा रही है।
बगैर चिकित्सक की अनुमति के कोख दूसरे को देना अपराध
एसपी ने बताया कि किराए की कोख के लिए कानून है। चिकित्सक की अनुमति से ही ऐसा कर सकते हैं। उसके भी नियम है। बिना एग्रीमेंट के कोई भी ऐसा नहीं कर सकता। विदेशी दंपती के लिए किराए की कोख देना गैर कानूनी है। महिलाओं से पूछताछ की जा रही है।
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