संभागीय परिवहन विभाग में करीब 13 हजार ऑटो और छह हजार से अधिक ई-रिक्शा का रजिस्ट्रेशन है। ई-रिक्शा की संख्या रोकने के लिए विभाग ने कुछ साल पहले रजिस्ट्रेशन पर रोक लगाई थी लेकिन ई-रिक्शा एजेंसी वाले न्यायालय से आदेश ले आए थे। अब विभाग दूसरी तरह से संख्या नियंत्रण के प्रयास में लगा है। इसके लिए वाराणसी और वृंदावन मॉडल को लागू करने किया जा सकता है। वहां पर रूट निर्धारण से क्यूआर कोड सिस्टम तक लागू किया गया है। इससे जाम की समस्या भी कम हुई है।
शहर के हर चौराहे पर ऑटो और ई-रिक्शा के कारण जाम लगा रहता है। एआरटीओ (प्रवर्तन) आलोक कुमार ने बताया कि वृंदावन में ई-रिक्शा और ऑटो के लिए नियम निर्धारित किए हैं। उसी तरह का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। पहले तो संख्या के हिसाब से रूट का निर्धारण किया जाएगा। इसके साथ अलग-अलग कलर और क्यूआर कोड होगा, जिससे रूट के हिसाब से ऑटो की आसानी से पहचान हो सकेगी। क्यूआर कोड में ऑटो और चालक की सारी जानकारी होगी। यह प्रस्ताव जल्द आरटीए की बैठक में रखा जाएगा।