वन विभाग के यमुना किनारे सर्वे में चित्रा इंडिका के कछुओं के 20 प्रजनन स्थल मिले हैं। इनमें 1500 से अधिक अंडे हैं। ये संकटग्रस्त प्रजाति के हैं और गंगा किनारे मीठे पानी में पाए जाते हैं। यमुना किनारे पर इतनी संख्या में अंडे मिलने से विभाग उत्साहित है।
वन विभाग और वाइल्डलाइफ सर्वाइवल अलायंस ने 16 से 18 सितंबर तक सूर सरोवर पक्षी विहार से कछवारा घाट तक सर्वे किया। इसमें टीम ने रेतीले टापुओं पर नैरो-हेडेड सॉफ्टशेल कछुए के 20 प्रजनन स्थल चिह्नित किए। इनमें 1500 से अधिक अंडे हैं। इनको सुरक्षित रखने के लिए निगरानी शुरू कर दी है। सर्वे में मीठे पानी के कछुओं की पांच प्रजातियों और करीब 35 प्रजातियों के पक्षी भी दर्ज किए हैं। अभी तक चंबल क्षेत्र में ये मिलते हैं, लेकिन यमुना किनारे पाए जाने से इसकी जैव विविधता का महत्व और बढ़ गया है। इनको वैज्ञानिक ढंग से निगरानी कर संरक्षित किया जाएगा।
चित्रा इंडिका की ये है विशेषता:
चित्रा इंडिका छोटे सिर नरम खोल वाला कछुआ है। ये भारत और पाकिस्तान की नदियों का दुर्लभ जलीय जीव है। इसकी लंबाई 140 से 1180 सेमी तक होती है। इनका वजन तीन क्विंटल तक हो सकता है। आकार करीब 5.5 × 4.5 फीट होता है। मादा कछुआ आकार में बड़ी होती हैं। इनके प्रजनन जुलाई से नवंबर तक होता है। अगस्त-सितंबर में अंडे देते हैं। मादा 65 से 250 तक अंडे रेत में देती हैं।