आगरा। घरों में पानी घुस गया है। रास्ते से निकलना मुश्किल है। बिजली कट गई है, इससे पीने का पानी नहीं भर पा रहे हैं। मां का इलाज कराना है। पुलिस प्रशासन कोई जवाब नहीं दे पा रहा है। चोरी का खतरा होने से घरों को छोड़कर जा नहीं सकते हैं। दिन में घर के बाहर तो रात छत पर काटनी पड़ रही है। यह कहना है बल्केश्वर स्थित रजवाड़ा इलाके के शिवम का।
बुधवार दोपहर 2 बजे अमर उजाला टीम ने रजवाड़ा मोहल्ले में लोगों से बात की। शिवम ने बताया कि गली में तीन दिन पहले 2 फीट तक पानी भर गया था। मगर बुधवार को पानी एक फुट कम हुआ है। मगर, इससे समस्या हल नहीं हुई है। पानी के साथ नाले-नालियों की गंदगी भी आ रही है। पानी घरों में घुसने से बीमारियों का खतरा भी है। शिवम ने बताया कि मां बीमार हैं। वह छत पर भी नहीं जा सकती हैं। उन्हें चलने फिरने में दिक्कत है। बिजली नहीं आने से परेशानी हो रही है। इलाज के लिए चिकित्सक को भी नहीं ला पा रहे हैं।
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घरों से पानी निकालने के इंतजाम नहीं
सुरेश चंद ने बताया कि तीन दिन से पानी निकाल रहे हैं। इसके बावजूद राहत नहीं मिल पा रही है। घरों के आगे दीवार भी की गई थी। इसके बावजूद पानी घुस गया। प्रशासन की ओर से पानी निकालने के लिए कोई इंतजाम नहीं हैं। मोहन सिंह और करन ने कहा कि गली में पानी की वजह से सांप और बिच्छू आने का खतरा भी बढ़ गया है। बच्चों को घर से नहीं निकलने दे रहे हैं। पूरे दिन घरों की छत पर रहते हैं।
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क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों के प्रति गुस्सा
रजवाड़ा निवासी बच्चू सिंह ने बताया कि वह बाढ़ राहत शिविर में गए थे। वहां पर जनप्रतिनिधि मिल गए। उन्होंने शिविर में आते ही सवाल कि वोट तो देते नहीं हो, फिर भी शिविर में रहने दिया जाएगा। यह सुनकर वो वापस आ गए। मोनू ने बताया कि क्षेत्र में पानी भरने की वजह से समस्या हो रही है। इसके बावजूद पुलिस प्रशासन कोई इंतजाम नहीं कर रहा है।
पंप लगाकर निकाल रहे पानी
शिव रेजिडेंसी में बाढ़ का पानी अधिक है। इससे क्षेत्र का मंदिर में पानी भर गया है। काॅलोनी में पानी नहीं आए, इसके लिए लोगों ने बोरी में सैंड भरकर रख दिए हैं। पानी को निकालने के लिए पंप भी लगा दी गई है, जिससे पानी को निकाला जा सके। आसपास के दो घरों से लोग चले गए हैं।
काम धंधे पर नहीं जा पा रहे
रजवाड़ा में जिन घरों में पानी भरा है, उनकी संख्या 35 से अधिक है। इस इलाके की बिजली भी काट दी गई है। तीन दिन से लोग परेशान हैं। गली के रास्ते से भी नहीं निकल पा रहे हैं। काम धंधे पर भी लोग नहीं जा पा रहे हैं।