बाह। धनतेरस 100 साल बाद शनिवार को भौमादित्य, बुधादित्य और गज लक्ष्मी योग में मनाई जाएगी। ज्योतिषाचार्य शिवशरण पाराशर ने बताया कि गुरु के उच्च की अवस्था में होने की वजह से दुर्लभ योग की शुभता बढ़ गई है। यही वजह है कि इस बार धनतेरस पर खरीदारी करने से लाभ और एश्वर्य की प्राप्ति होगी। उन्होंने बताया कि शनिवार की दोपहर 12.20 बजे से रविवार दोपहर 1.52 बजे तक धनतेरस रहेगी। धनतेरस की पूजा शाम होती है। इसलिए शनिवार को ही मां लक्ष्मी के साथ भगवान कुबेर, यमराज के साथ धन्वंतरि की पूजा होगी। धनतेरस के दिन सोना, चांदी, लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति, बर्तन, झाड़ू की खरीदारी शुभ रहेगी।
ऐसे कर सकते हैं पूजन
पूजा के स्थान पर सांयकाल में कुबेर और माता लक्ष्मी की मूर्ति स्थापित करें। उसके बाद धन्वंतरि देवता, माता लक्ष्मी और कुबेर देवता के सामने घी का दीपक जलाकर उनकी पूजा करें और आरती उतारें। दीपक जलाने के बाद उन्हें फल और फूल चढ़ाएं। फिर माता लक्ष्मी और कुबेर देव को उनका प्रिय भोग लगाएं और उस भोग को प्रसाद के रूप में परिवार के लोगों को बांटें।
अकाल मृत्यु से बचने को दरबाजे पर जलाएं चार बातियों का दीया
ज्योतिषाचार्य शिवशरण पाराशर ने बताया कि धनतेरस पर अकाल मृत्यु से बचने के लिए रात में घर के दरवाजे पर 4 बातियों का दीपक जलाना चाहिए। रात्रि में आरोग्य प्राप्ति के लिए भगवान धन्वंतरि और समृद्धि के लिए कुबेर के साथ लक्ष्मी का आह्वान करना चाहिए।