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Agra News: लुप्तप्राय घड़ियाल और इंडियन स्कीमर को चंबल में मिला नया जीवन

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बाह। दुनिया में लुप्तप्राय स्थिति में पहुंचे घड़ियाल और इंडियन स्कीमर के लिए चंबल नदी ने संजीवनी का काम किया है। इनका कुनबा बढ़ा है, दुनिया की 80 फीसदी आबादी चंबल में मौजूद है। तीन राज्यों मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश में होकर बहने वाली चंबल नदी के 435 किमी एरिया में 1981 से घड़ियालों का संरक्षण हाे रहा है। 1975-77 में हुए विश्वव्यापी सर्वे में दुनिया भर में 200 घड़ियाल बचे थे, जिनमें से 46 चंबल नदी में थे। संरक्षण के परिणाम सुखद रहे हैं। पिछले साल हुए सर्वे में इनका कुनबा 2176 से बढ़ कर 2456 हो गया था। बाह के रेंजर उदय प्रताप सिंह ने बताया कि देवरी पुर्नवास केंद्र से 78 घड़ियाल छोड़े जाने के बाद आबादी 2534 हो गई है, जो दुनिया की 80 फीसदी के करीब है। दुनिया में संकटग्रस्त हुई इंडियन स्कीमर के संरक्षण के लिए 2015 में चंबल नदी को चुना गया था। पिछले साल इनका कुनबा 740 से बढ़ कर 843 हो गया था। इंडियन स्कीमर के संरक्षण पर काम कर रहे रोहित झा ने बताया कि दुनिया की 80 फीसदी आबादी चंबल में है। मई में चंबल नदी के टापू पर इंडियन स्कीमर प्रजनन करती हैं। जो शुभ संकेत है।
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सिर्फ चंबल में बची है कछुओं की साल प्रजाति, पल रही 8 प्रजातियां
दुनिया में संकट में पड़े कछुओं की 8 प्रजातियां चंबल में पल रही हैं। रेंजर उदय प्रताप सिंह ने बताया कि इनकी आबादी 15 हजार से भी ज्यादा है। कछुओं की साल प्रजाति सिर्फ चंबल में बची है। इनका कुनबा 500 के करीब है। कछुओं की ढोर प्रजाति भी चंबल के अलावा एक दो प्रतिशत गंगा नदी में बची है। वन विभाग और टर्टल सर्वाइवल एलायंस के संयुक्त प्रयास से चंबल नदी में कछुओं की संकटग्रस्त 8 प्रजातियों साल, ढोर, सुंदरी, मोरपंखी, कटहवा, पचेडा, स्योत्तर, त्रिकुटी का संरक्षण हो रहा है। वन विभाग और टर्टल सर्वाइवल एलायंस की मेहनत के सुखद परिणाम सामने आये हैं।




डॉल्फिन पर होगा शोध
5 अक्टूबर 1995 में डॉल्फिन को राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित कर संरक्षण के लिए चंबल नदी को चुना गया था। पिछले साल डॉल्फिन की आबादी 96 से बढ़कर 111 हो गई है। रेंजर ने बताया कि चंबल का साफ पानी डॉल्फिन अनुकूल साबित हुआ है। मद्रास के शोधार्थी डॉल्फिन पर चंबल नदी में शोध करेंगे। जिससे महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आने की उम्मीद है।
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