फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Agra News: बटेश्वर में बही विकास की गंगा, फिर भी अटल का ‘आंगन’ प्यासा<bha>--</bha>-चार फोटो

विज्ञापन
बटेश्वर स्थित अटलविहारी वाजपेयी का पैतृक घर खंडहर मे तब्दील
विज्ञापन
बटेश्वर। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार मिनी काशी कहलाने वाले तीर्थ बटेश्वर को वैश्विक ईको-पर्यटन के मानचित्र पर चमकाने के लिए खजाना खोल चुकी है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के इस पैतृक गांव पर चारों ओर विकास का भारी शोर है। कहीं 106 करोड़ का भव्य कॉरिडोर आकार ले रहा है, तो कहीं 101 प्राचीन शिव मंदिरों की शृंखला निखर रही है लेकिन इस चकाचौंध के बीच एक टीस देने वाली हकीकत भी है कि जिस महापुरूष के नाम पर यह सारा विकास हो रहा है, उन्हीं अटल जी का पैतृक घर आज खंडहर बनकर अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है।
विज्ञापन


बटेश्वर के गौरव को पुनर्स्थापित करने के लिए शासन स्तर पर भारी निवेश किया जा रहा है। यहां 106 करोड़ की लागत से यमुना के घाटों का आधुनिकीकरण और भव्य कॉरिडोर का निर्माण जारी है। करीब 5 करोड़ से दो भव्य प्रवेश द्वार और 17 करोड़ से प्राचीन मंदिरों का संरक्षण किया जा रहा है।27 करोड़ के पैकेज से आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और साइन बोर्ड लगाए जा रहे हैं। जैन तीर्थ शौरीपुर भगवान नेमिनाथ की जन्मस्थली के लिए भी 2.75 करोड़ की योजना पर काम चल रहा है।इंसेट
रेलवे स्टेशन और म्यूजियम की तैयारी



अटल जी की स्मृतियों को संजोने के लिए बटेश्वर स्टेशन को ‘बी’ क्लास क्रॉसिंग स्टेशन में बदला जा रहा है। साथ ही, उनकी एक विशाल प्रतिमा, गैलरी और भव्य संग्रहालय बनाने की तैयारी भी जोरों पर है।
विज्ञापन




इंसेट
अटल पथ पर विकास का शोर, पर सिसक रहा है उनका पुश्तैनी ठौर

हैरानी की बात यह है कि जहां सरकार अटल जी के नाम पर नए स्मारक और मूर्तियां खड़ी कर रही है, वहीं उनकी वास्तविक विरासत उनका पैतृक घर (हवेली) पूरी तरह उपेक्षित है। वह घर, जहां से देश के सबसे प्रिय प्रधानमंत्री की जड़ें जुड़ी थीं, आज झाड़-झंखाड़ और घास-फूस का अड्डा बन चुका है।



इंसेट
विकास की फाइलों में हवेली का पता भूल गई सरकार

ग्रामीणों का दर्द है कि सरकार विकास की फाइलों में उस घर का पता भूल गई है, जिसने पूरे देश को सुशासन की नई राह दिखाई। स्थानीय लोगों का कहना है, क्या हम केवल प्रतीकों को पूजेंगे? करोड़ों के कॉरिडोर के बीच अटल जी के खंडहर घर को संरक्षित न करना उनकी स्मृति के साथ अन्याय है। उनका कहना है कि बटेश्वर की सूरत तो बदल रही है लेकिन सवाल वही है, क्या भव्य कॉरिडोर और पत्थरों के म्यूजियम के बीच उस पुराने घर की मिट्टी को भी मान मिलेगा, जहां कभी अटलजी का बचपन बीता।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें