आगरा नगर निगम के वार्डों की आरक्षण सूची जारी हो गई है। इससे वर्तमान 80 फीसदी पार्षद अपने वार्ड से चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। 25 फीसदी से ज्यादा पार्षद ऐसे भी हैं, जिनके आसपास सामान्य वार्ड नहीं है। ऐसे में वह दोबारा चुनाव मैदान में नजर नहीं आएंगे। नई आरक्षण सूची जारी होने से दोबारा पार्षद बनने का सपना संजोए बैठे कई दावेदार मायूस हो गए हैं। अब लोगों की निगाह महापौर के आरक्षण सूची पर है।
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लंबे इंतजार के बाद शुक्रवार शाम को नगर निकाय चुनाव, नगर पालिका व पंचायतों के वार्डों की आरक्षण सूची जारी कर दी गई। चक्रानुक्रम आरक्षण सूची में बड़े पैमाने पर फेरबदल किया गया है। महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण के हिसाब से वार्डों का आवंटन किया गया है। इससे अधिकांश वर्तमान पार्षदों की दावेदारी लगभग खत्म हो गई है।
10 फीसदी ही पुराने चेहरे आएंगे नजर
जो दावेदार इस बार चुनाव मैदान में उतरेंगे, उन्हें अपना वार्ड बदलना होगा लेकिन कई पार्षद ऐसे भी हैं, जिनके आसपास भी महिला आरक्षित वार्ड ही हैं। ऐसे में उन्हें चुनाव लड़ने के लिए दूर जाना होगा या फिर उन्हें मैदान से हटना होगा। शहर के बाहरी इलाकों को नगर निगम की सीमा में शामिल होने के बाद भौगोलिक स्थिति बदलने के साथ ही जातिगत आंकड़े भी बदल चुके हैं। ऐसे में इस बार के नगर निगम चुनाव में पुराने चेहरे 10 फीसदी ही मैदान में नजर आ सकते हैं। आरक्षण सूची की जारी होते ही राजनीतिक दलों ने दावेदारों की तलाश शुरू कर दी है।
आरक्षण सूची को लेकर आपत्ति दाखिल करने के लिए सात दिन का समय दिया गया है। इसमें दावेदार और पार्षद जिलाधिकारी कार्यालय में अपनी आपत्तियां दाखिल कर सकते हैं, जिनका निस्तारण किया जाएगा। अब महापौर की आरक्षण सूची का आना बाकी रह गया है।