1929 में हुआ था दंगा
घटिया मामू-भांजा में 1929 में दंगा हुआ था। कई लोगों की जान गई। अंग्रेजों की पलटन को डेरा डालना पड़ा। दंगे का केस जज बैनट की अदालत में चला। वकील ऐल्सटन और शिवदत्त भार्गव के बीच बहस ली। इसके बाद दंगे के दोषी अजमेरी को फांसी की सजा सुनाई गई। बाद में यह उम्रकैद में बदली थी।
1947 में बदल गई तस्वीर
घटिया मामू-भांजा की तस्वीर 1947 में बदल गई। बंटवारे के वक्त यहां के कई लोग पाकिस्तान चले गए। उनकी जगह दूसरे लोग आए।
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