आगरा खंड की शिक्षक सीट पर डॉ. आकाश अग्रवाल ने 12वें प्रत्याशी के दूसरी वरीयता के मतों की गिनती के दौरान निर्धारित कोटा पार कर जीत हासिल की। स्नातक सीट पर डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह 44,495 के निर्धारित कोटे तक नहीं पहुंचे, लेकिन 41,806 मतों के साथ सर्वाधिक वोट पाने पर विजेता घोषित किए गए।
विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव की मतगणना में इस बार कोटा हासिल करने के लिए प्रत्याशियों को भारी मशक्कत करनी पड़ी। पहली बार ऐसा हुआ जब जीत का तय कोटा पाने के लिए दूसरी वरीयता के मतों की गिनती अंतिम प्रत्याशी तक जा पहुंची। शिक्षक निर्वाचन में फैसला 12वें प्रत्याशी के मतों की दूसरी वरीयता की गिनती से हुआ। वहीं, स्नातक निर्वाचन में सभी प्रत्याशियों के दूसरी वरीयता के मतों की गिनती के बाद भी किसी को आधे से ज्यादा मत नहीं मिले। ऐसे में नियमानुसार सबसे ज्यादा मत पाने वाले डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह को विजयी घोषित किया गया।
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शिक्षक सीट पर कोटा 13,869 मतों का तय था। भाजपा के हरि किशोर तिवारी को केवल 9,783 मत ही मिले। प्रथम वरीयता में किसी को कोटा न मिलने पर दूसरी वरीयता के वोटों की गिनती शुरू हुई। आखिरकार 12वें निर्दलीय प्रत्याशी के दूसरी वरीयता के मतों के अंतरण की बदौलत डॉ. आकाश अग्रवाल ने तय कोटा हासिल कर शानदार जीत दर्ज की।
दूसरी ओर, स्नातक सीट पर कोई भी प्रत्याशी दूसरी वरीयता की गणना के बाद भी 44,495 मतों का निर्धारित कोटा हासिल नहीं कर सका। हालांकि, 13वें प्रत्याशी के दूसरी वरीयता के मतों की गिनती पूरी होने के बाद भाजपा प्रत्याशी डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह ''गुरुजी'' 41,806 वोट पाकर सर्वाधिक मतों के आधार पर विजयी घोषित कर दिए गए। इस सीट पर सपा प्रत्याशी शशांक यादव 'सीटू' 27,324 वोटों पर सिमट गए, जबकि निर्दलीय मैदान में उतरे अंबरीश पाल सिंह 13,156 मत हासिल कर तीसरे स्थान पर रहे।
गौरतलब है कि पिछले चुनावों में अमूमन 4 से 5 सबसे कम मत पाने वाले प्रत्याशियों की दूसरी वरीयता गिनने पर ही फैसला हो जाता था, लेकिन इस बार चैलेंज वोटों और आपत्तियों के चलते मतगणना की रफ्तार काफी धीमी रही और गिनती आखिरी प्रत्याशी तक ले जानी पड़ी।
इन सीटों पर जीत का ये है नियम
नियमानुसार शिक्षक और स्नातक एमएलसी सीट पर जीत के लिए प्रथम वरीयता में कुल पड़े मतों के 50 फीसदी से एक वोट ज्यादा मिलने जरूरी होते हैं। इसे कोटा कहा जाता है। चूंकि इन चुनावों में हर मतदाता को अपनी पसंद के अनुसार प्रत्याशियों को वरीयता देने की आजादी होती है। ऐसे में बढ़त बनाए प्रत्याशी को प्रथम वरीयता प्रथम वरीयता में वोटों का निर्धारित कोटा हासिल न हो तो दूसरी वरीयता की गिनती शुरू होती है।
44 हजार था कोटा, 41 हजार मिले मानवेंद्र को वोट
मतगणना के दौरान मानवेंद्र गुरुजी को पहली वरीयता के 41608 वोट मिले। कोटा 44495 मत का था, इसलिए दूसरी वरीयता की गिनती की गई। हालांकि सभी प्रत्याशियों के मतों में दूसरी वरीयता के मतों की गिनती के बाद भी आंकड़ा 41806 पर आकर रुक गया। इसके बाद निर्वाचन आयोग के नियमों के अनुसार मानवेंद्र को विजेता घोषित किया गया। वहीं, डॉ. आकाश को प्रथम वरीयता में 13067 मत मिले। 12 वें प्रत्याशी के मतों की दूसरी वरीयता की गिनती के दौरान 13896 का कोटा पार कर लिया और कुल 14046 मत प्राप्त किए।