मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के निदेशक प्रो. दिनेश राठौर ने बताया कि 1857 की क्रांति होने पर अंग्रेज अफसर लेफ्टिनेंट गवर्नर जेआर केल्विन की मानसिक स्थिति बिगड़ गई। इसके बाद ऐसे कई अफसरों को परेशानी होने लगी। ये पूरी जानकारी ब्रिटिश शासन को पहुंची। इसे गंभीरता से लेते हुए महारानी क्वीन विक्टोरिया ने आगरा में इसके लिए विशेष अस्पताल खोलने के आदेश दिए। इस पर 1859 में मेंटल हॉस्पिटल की शुरुआत हुई। तब इसमें अंग्रेजों का ही इलाज होता था।
इसमें इलेक्टि्रक शॉक देकर भी उपचार किया जाता था। इसमें मरीज को कष्ट होता था। एक तरह से यहां जेल की तरह की व्यवस्थाएं संचालित होती थीं। इसी के कारण इसके प्रभारी जेल के आईजी हुआ करते थे। धीरे-धीरे मानसिक रोगों के इलाज में बदलाव आया। अब इलेक्टि्रक शॉक देने की जरूरत नहीं है। ये विधि खत्म कर दी है। अब रिपीटेड ट्रांस क्रैनियल मैग्नेटिक सिमुएलेशन (आरटीएमएस) विधि से इलाज हो रहा है। इससे चुंबक विधि से मरीज का उपचार किया जाता है।
नाक के जरिये ऑक्सीजन की मात्रा कितनी रही। रक्तचाप कितना है। मशीन में ये सभी रिकाॅर्ड हो जाते हैं। कक्ष में सीसीटीवी कैमरे से मरीज कितनी बार करवटें लीं, बेचैनी-घबराहट तो नहीं हो रही। ये भी कैमरे में रिकार्ड करते हैं। ये पूरी प्रक्रिया होने के बाद वैज्ञानिक ढंग से इन रिकार्ड तथ्यों का अध्ययन कर अनिद्रा की वजह तलाश कर इलाज करते हैं। नींद न आना, कई घंटे सोने पर भी सुस्ती रहना या फिर नींद की गोलियां लेने वाले मरीज इसका लाभ ले रहे हैं। अभी तक 80 से अधिक मरीज ठीक हो चुके हैं।
आगरा का मानसिक स्वास्थ्य संस्थान की स्थिति:
- 172 एकड़ में फैला हुआ है संस्थान
- 26 से ज्यादा भवन हैं परिसर में
- 550 मरीज वर्तमान में भर्ती हैं।
- 300 मरीज ओपीडी में लेते हैं परामर्श
- 05प्रोफेसर, 04 सीनियर रेजिडेंट, 04मेडिकल ऑफिसर, 24 जूनियर रेजिडेंट
- 60 हजार से अधिक मनोचिकित्सक से जुड़ी पुस्तकें हैं।
- 20 एमडी के छात्र, 01 एनेस्थीसिया के डॉक्टर हैं
- साइकोलोजिकल लैब है, जिसे सभी तरह क मानसिक रोगों की जांच होती है।