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आगरा नगर निगम में गजब का हाल: भ्रष्टाचार का जो है आरोपी, मेयर ने उसे ही बनाया ओएसडी

Fri, 21 Jul 2023 01:16 PM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला, आगरा

सार

मेयर ने जिसे ओएसडी बनाया है, उसके ऊपर 238 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच चल रही है। भाजपा के विधायक डॉ. जीएस धर्मेश ने सीएम योगी आदित्यनाथ से शिकायत की थी।
 
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मेयर हेमलता दिवाकर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आगरा की मेयर हेमलता दिवाकर ने भ्रष्टाचार के खिलाफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की शून्य सहनशीलता की नीति के ठीक उलटअपना ओएसडी उसे बनाया, जिसके खिलाफ नगर निगम में रहते हुए 238 करोड़ रुपये की संपत्ति जुटाने का आरोप लगा है। बुधवार शाम को मेयर ने राकेश बंसल को अपना ओएसडी बनाने का आदेश जारी किया। भाजपा के ही छावनी क्षेत्र के विधायक डॉ. जीएस धर्मेश ने राकेश बंसल पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री से शिकायत की थी। बृहस्पतिवार को नगर निगम में बसपा के पार्षदों ने मेयर हेमलता दिवाकर का नियुक्ति आदेश दिखाकर नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल से विरोध दर्ज कराया, तो आम आदमी पार्टी के कपिल वाजपेयी ने भी विरोध किया।
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बसपा पार्षद दल नेता सुहैल कुरैशी के नेतृत्व में नगर आयुक्त से मिलने गए पार्षदों ने कहा कि नगर निगम के पूर्व कर्मचारी राकेश बंसल पर 238 करोड़ रुपये की संपत्ति भ्रष्टाचार से बनाने के आरोप हैं। उन्हें पूर्व नगर आयुक्त निखिल टी फुंडे ने निकाल दिया था। जब तक विजिलेंस जांच में वह निर्दोष साबित न हो जाएं, तब तक उन्हें निगम के हर मामले से दूर रखा जाए। पार्षद सुनील शर्मा ने राकेश बंसल को मेयर का ओएसडी बनाए जाने पर विरोध जताया और कहा कि अगर आदेश वापस न लिया गया तो बसपा पार्षद विरोध करेंगे।

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निगम से इस नियुक्ति का लेना-देना नहीं

मेयर हेमलता दिवाकर ने बताया कि राकेश बंसल की नियुक्ति मैंने अपने व्यक्तिगत ओएसडी पद पर की है। नगर निगम से इसका कोई लेनादेना नहीं। मैंने नगर आयुक्त को केवल सूचना दी है। 

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नियुक्ति से मेयर की मंशा पता चल रही

जो व्यक्ति भ्रष्टाचार का आरोपी है, उसे ओएसडी बनाने से मेयर की मंशा पता चल रही है कि नगर निगम किस तरीके से चलेगा। क्या नगर निगम के 4500 कर्मचारियों में कोई अनुभवी नहीं जो ओएसडी बनाया जा सके। ऐसा है तो ऐसे कर्मचारियों को हटाओ। -बंटी माहौर, पार्षद

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इस मामले में जांच की मांग कर रहे

आम आदमी पार्टी नेता कपिल वाजपेयी ने कहा कि ओएसडी नियुक्त करने का अधिकार नगर आयुक्त का है, न कि मेयर का। भ्रष्टाचार के आरोपी को भाजपा की मेयर ने जिस तरह नियुक्त किया है, उससे सब साफ है। डीएम, नगर आयुक्त और नई कमिश्नर से इस मामले में जांच की मांग कर रहे हैं।
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