फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आगरा में भी हैं 'नीरव मोदी' और 'विजय माल्या', डकार गए इतने करोड़ रुपये

Wed, 21 Feb 2018 12:41 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
विज्ञापन
Fraud
विज्ञापन
बैंकों से लोन लेकर न चुकाने वालों की सूची में आगरा के उद्यमियों के भी नाम हैं। यहां 65 लोगों पर बैंकों के 575 करोड़ रुपये फंसे हुए हैं, जबकि बैंकों का आगरा के उद्यमियों पर कुल एनपीए 1700 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है। हैरतअंगेज पहलू ये है कि किसानों से 9 गुना ज्यादा एनपीए उद्यमियों का हो रहा है। 
विज्ञापन


बैंकों के मुताबिक यह विलफुल डिफाल्टर (जानबूझकर कर्ज न लौटाने वाले) हैं, जिनके खिलाफ लगातार कानूनी कार्रवाई की जा रही हैं। बैंकों पर फंसे हुए कर्ज एनपीए की वसूली के लिए सरफेसी एक्ट के तहत बैंकों ने सख्ती की तो बैंक मैनेजरों के कारनामे सामने आ रहे हैं। आगरा में 65 उद्यमियों पर बैंकों के 575 करोड़ रुपये फंसे हुए हैं। 

ब्योरा भारतीय रिजर्व बैंक को इसी वित्तीय वर्ष में भेजा जा चुका है। हर बैंक से उनके दस बड़े डिफाल्टरों के नाम मांगे गए थे, लेकिन कई मैनेजरों ने तो यह सूची ही रुकवा दी। कई बैंकों के बड़े अधिकारी इस खेल में शामिल हैं। केवल 7-8 बैंक ही अपने डिफाल्टरों की सूची रिजर्व बैंक को दे पाए। आगरा में कुल 1700 करोड़ रुपये उद्योग जगत पर एनपीए के रूप में फंसे हुए हैं। 
विज्ञापन

एक ही नाम-पते पर कई कंपनियों को लोन

demo pic - फोटो : अमर उजाला
जिन डिफाल्टरों के नाम रिजर्व बैंक को भेजे गए हैं, उनमें से ज्यादातर को एक ही पते पर कई कंपनियों के नाम से लोन दिया गया है। न्यू आगरा की ब्रांच में ऐसे कई फर्जी कंपनियों के संचालक हैं। 

जिन्होंने करोड़ों रुपये एक ही संपत्ति के नाम पर लिए हैं। पत्नी, बच्चों, रिश्तेदारों को कंपनी का निदेशक दिखाकर घर के पते पर लोन लिया गया। 

आगरा में ऐसे बैंक मैनेजरों की बड़ी संख्या है, जो कर्ज देने में आगे रहे हैं। इनमें केनरा बैंक की बेलनगंज शाखा का नाम भी लिया जाता है। यहां रहे एक मैनेजर ने ताबड़तोड़ लोन बांटे, जिनका अधिकांश हिस्सा एनपीए हो गया। 

बैंक आफ इंडिया की जीवनी मंडी, न्यू आगरा और मारुति इस्टेट शाखा ऐसी रही है जिनमें सबसे ज्यादा लोन बांटा गया। पंजाब नेशनल बैंक की संजय प्लेस और न्यू आगरा शाखा से भी लोन दिया गया है। इन्हीं शाखाओं से सबसे ज्यादा एनपीए हुआ है।
विज्ञापन

लोन बांटकर छोड़ दी थी नौकरी

बैंक आफ इंडिया के एक मैनेजर करोड़ों रुपये के लोन देने में इस कदर चर्चित हो चुके थे कि जिले की सभी शाखाओं के मैनेजरों ने अपने परिचितों को उनके पास ही लोन लेने भेजना शुरू कर दिया था। 

दो ब्रांच में मैनेजर रहकर उन्होंने करोड़ों रुपये का लोन बांटा जो एनपीए होता चला गया, लेकिन प्रबंधन फिर भी नहीं चेता। करोड़ों का खेल करने के बाद युवा मैनेजर ने नौकरी छोड़ दी। सूत्रों के मुताबिक अब वह दक्षिण भारत में हैं।

बैंकों के सामने सबसे बड़ी मुश्किल ये है कि जिन उद्यमियों पर करोड़ों रुपये का लोन एनपीए हो चुका है और जिसे वह जानबूझकर नहीं चुका रहे हैं, उसकी वसूली मुश्किल हो रही है। 

सरफेसी एक्ट की कार्रवाई और डेट रिकवरी ट्रिब्यूनल में मामले के बाद अपील, इन सब में लगने वाले समय को बैंकों के करोड़ों डकारने वाले कानूनी दांवपेंच से बढ़ा देते हैं। बैंकों द्वारा एक पाई भी न वसूल पाने की बात कई उद्यमी सार्वजनिक कार्यक्रमों में कहते नजर भी आए हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें