‘तुमते सच कह रहे, चार दिन ते बस चावल खाय रहे। घर में चून (आटा) नाय। चक्की वारौ आटे के 50 किलो के कट्टा ऐ 3600 रुपया मै दै रह्यौ है। इतेक पैसा कहां ते लाएं। याते तौ हम बीमारी ते ही मर जाएं। हमारे बाप बड़े-बूढ़े हैं। बिनैं एक रोटी ऊ नाय दै पाए तौ कैसी संतान हैं हम।’ यह पीड़िता आगरा जिले के उन लोगों की है, जिनकी रोटी कालाबाजारी ने छीन ली है। पढ़ें
किरावली के गांव रायभा के प्रजापति राम भरोसी के घर के बाहर घड़ों का अंबार लगा है। कोई खरीदने वाला नहीं है। घर में 25 लोगों का परिवार है। घर में कई दिनों से रोटी नहीं पकी है। परिवार के लोग चावल खाकर पेट भर रहे हैं।
राम भरोसी कहते हैं, 'हमैं तौ कोई मोदी ते मिलवाय दै बस। हम बिनते विनती कर लंगे। रिश्तेदारन ते ऊ पूछ लई पर बिनके पास भी आटौ नाय। चावल ते कैसे पेट भरैं। आत्मा ते कह रहे, हम भूख ते मरंगे। ऐसे टाइम मै कोई कर्ज भी नाय दै रह्यौ।'