देश में 65 फीसदी और विदेशों में 27 फीसदी जूते की आपूर्ति करने वाले आगरा के चमड़े के जूतों को जल्द ही जीआई टैग मिलने की उम्मीद है। मुगल काल में 500 साल पहले यहीं से जूतों को बनाने का काम शुरू किया गया था। इसे जियोग्राफिकल इंडिकेशन टैग (जीआई टैग) दिलाने की कवायद तेज हो गई है।
आगरा फुटवियर मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स चैंबर (एफमेक) ने जिला उद्योग केंद्र की मदद से जीआई टैग पाने के लिए आवेदन किया है। 22 नवंबर को दिल्ली में रजिस्ट्रार (जीआई) की बैठक में सकारात्मक संकेत मिले हैं। दो साल पहले आगरा ने यह आवेदन किया था।
एफमेक ने रजिस्ट्रार को आगरा में जूतों के निर्माण होने के तथ्य सौंपे हैं। इसमें आगरा गजेटियर, इंपीरियल गजेटियर और कई पुस्तकों को दस्तावेज के रूप में लगाया गया है। जूते बनाने की प्रक्रिया, क्षेत्र, नक्शा, हुनर का अनूठापन और क्वालिटी कंट्रोल समेत जूते के बनने के 29 चरण आवेदन के साथ प्रस्तुत किए गए हैं।