रेलवे ने इस बजट में एक रेलवे स्टेशन, एक उत्पाद योजना की घोषणा की थी। इसका उद्देश्य उस शहर की पहचान वाले उत्पादों को स्टेशन पर विक्रय करने और कला को बढ़ावा देना है। इसके तहत देश के 20 स्टेशनों में से आगरा कैंट रेलवे स्टेशन को भी चुना गया है, अब योजना को जमीन पर लाने के लिए काम शुरू कर दिया गया है।
देशभर से आगरा आने वाले यात्री आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर 25 मार्च से आगरा के मार्बल हस्तशिल्प की कलाकृतियां खरीद सकेंगे। यहां नन्हा ताज और मार्बल की मूर्तियां, कैंडल स्टैंड समेत अन्य कलाकृतियां स्टॉल पर रहेंगी। ट्रेनों के भीतर भी इन्हें बेचा जा सकेगा। इसके लिए आवेदन की प्रक्रिया चल रही है। लॉटरी के माध्यम से स्टॉल धारकों का चयन किया जाएगा।
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रेलवे ने इस बजट में एक रेलवे स्टेशन, एक उत्पाद योजना की घोषणा की थी। इसमें उस शहर की पहचान वाले उत्पादों को स्टेशन पर विक्रय करने और कला को बढ़ावा देना है। इसके तहत देश के 20 स्टेशनों में से आगरा कैंट रेलवे स्टेशन को भी चुना गया है। आगरा के मार्बल हस्तशिल्प को जगह दी गई है। इसमें मार्बल हस्तशिल्पी या हस्तशिल्प व्यापारी अपने उत्पादों की स्टॉल आगरा कैंट स्टेशन पर लगा सकेंगे।
आगरा रेल मंडल की वाणिज्य प्रबंधक प्रशस्ति श्रीवास्तव ने बताया कि 15 दिन के पायलट प्रोजेक्ट में मार्बल हस्तशिल्पियों से आवेदन मांगे गए थे। आवेदन ज्यादा होने के कारण स्टॉल धारकों का चयन करने को लाटरी पद्धति का सहारा लिया जाएगा। शिल्पी अपने उत्पाद को ट्रेनों के भीतर जाकर भी विक्रय कर सकेंगे। इस कला की खासियत को बता सकेंगे।
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कैंट स्टेशन पर ट्रेन के रुकते ही अब चाय...चाय की आवाजें ही नहीं सुनाई देंगी बल्कि आगरा का ताजमहल ले लो जैसे शब्द भी सुनने को मिलेंगे। प्लेटफॉर्म नंबर एक पर दो स्टॉल और दो व तीन नंबर प्लेटफॉर्म पर एक स्टॉल लगाई जाएगी। डीसीएम का कहना है कि पायलट प्रोजेक्ट के सफल रहने पर स्थायी रूप से स्टॉल आवंटित करने पर रेलवे बोर्ड निर्णय लेगा।
कन्फेडरेशन ऑफ टूरिज्म एसोसिएशंस के अध्यक्ष राजीव तिवारी ने बताया कि कैंट रेलवे स्टेशन पर मार्बल उत्पादों की प्रदर्शनी लगाने से देशभर के लोगों को यहां के हस्तशिल्प को जानने का मौका मिलेगा। अगर स्थायी रूप से बिक्री शुरू होगी तो निश्चित ही इस कला से जुड़े कारीगरों के लिए यह संजीवनी जैसा होगा। उनका रोजगार बढ़ेगा।