फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति करजई ने कहा-‘काबुलीवाला’ की तरह भारत से हमारा दिल का रिश्ता

Mon, 23 Apr 2018 11:00 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
विज्ञापन
अमर उजाला आईपीसीएस की श्रृंखला लिविंग हिस्ट्री में बोलते हामिद करजई - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई ने कहा कि भारत और अफगानिस्तान की साझी संस्कृति और विरासत है। साहित्य, कला, संस्कृति और संगीत एक जैसा है। गुरुदेव रवींद्र नाथ टैगोर के काबुलीवाला की तरह ही हमारा भारत से दिल का रिश्ता है। 
विज्ञापन


अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण में भारत का योगदान है। चिकित्सा, स्वास्थ्य, सिंचाई, बुनियादी सुविधाओं के विकास में भारत ने आगे बढ़कर हमारा साथ दिया। भारत के  अहिंसा और शांति के संदेश की आज अफगानिस्तान को जरूरत है।

हामिद करजई ने भारत-अफगानिस्तान रिश्तों की मजबूती और दक्षिण एशिया में शांति स्थापना में भारत की भूमिका को इन शब्दों में बयां किया। 

अमर उजाला और आईपीसीएस (इंस्टीट्यूट आफ पीस एंड कान्फ्लिक्ट स्टडीज) के कार्यक्रम ‘लिविंग हिस्ट्री’ में उन्होंने शिमला में बिताए अपने छात्र जीवन और अंतरराष्ट्रीय राजनीति, अनुभव को आगरा के लोगों के साथ साझा किया। 
विज्ञापन

हामिद करजई - फोटो : अमर उजाला
आईपीसीएस की सुहासिनी हैदर के साथ संवाद में करजई ने कहा कि भारत और अफगानिस्तान के बीच का जुड़ाव बुनियादी है। हमारी भावनाएं एक जैसी हैं। साहित्य, कला, संस्कृति और इतिहास एक है। अफगानी लोगों के साथ जुड़ाव ऐसा है कि काबुलीवाला की कहानी बनी, न कि वाशिंगटनवाला की। 

भारत ने अफगानिस्तान में बुनियादी ढांचे को बनाने में मदद की है। सलमा बांध हो या स्कूल, कालेजों की इमारतें। भावनात्मक रूप से भारत हमारे दर्द में साथ खड़ा है। अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई के जीवन पर गुरुदेव रवींद्र नाथ टैगोर का काफी प्रभाव है। 

उन्होंने टैगोर के काबुलीवाला के जरिए रिश्तों की अहमियत समझाई तो अपने जज्बातों को बयां करने के लिए भी टैगोर के शब्दों का ही प्रयोग किया। ताजमहल के दीदार के बाद जब एएसआई ने विजिटर बुक में लिखने के लिए कहा तो उन्होंने टैगोर के ताज के बारे में कहे गए शब्दों ‘काल के गाल पर टपका प्रेम का आंसू’ को लिखा। इसमें भी उन्होंने गुरुदेव टैगोर का जिक्र किया। 
विज्ञापन

शिमला की यादों में खो गए करजई

हामिद करजई - फोटो : अमर उजाला
जुलाई, 1976 में दिल्ली और फिर शिमला में पढ़ाई के दिनों की यादें साझा करते हुए पूर्व राष्ट्रपति करजई खो से गए। उन्होंने दिल्ली से कालका और शिमला तक टॉय ट्रेन की यात्रा की याद भी साझा की। 

करजई ने कहा कि विश्वविद्यालय में लगी महात्मा गांधी की प्रतिमा देखने के बाद उनके जीवन पर उनके विचारों का प्रभाव पड़ा। शांति, अहिंसा का पाठ पढ़ने के साथ ही शिमला में उन्होंने अंग्रेजी बोलना भी सीखा। भारत में पढ़ाई के दौरान उनका व्यक्तित्व और चरित्र बदल गया। 
 
पूर्व राष्ट्रपति करजई ने कहा कि उनके देश में भारतीय संस्कृति लोगों को पसंद आती है। राजकपूर, दिलीप कुमार, शाहरुख खान, अमिताभ बच्चन भारत की तरह ही अफगानिस्तान में मशहूर हैं। करजई से उनकी पसंद की फिल्में पूछने पर जवाब मिला कि कटी पतंग, गाइड और बैजू बाबरा, गंगा जमुना की तरह कई फिल्में पसंद हैं। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें