प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना (सांकेतिक तस्वीर)
प्रधानमंत्री (ग्रामीण) आवास योजना की रैंकिंग में अगस्त माह में आगरा प्रदेश में दूसरे नंबर पर है। इस रैंकिंग में शामली नंबर वन है। आगरा के अलावा मंडल का कोई अन्य जनपद टॉप-10 रैकिंग में स्थान नहीं बना सका है।
जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (डीआरडीए) के परियोजना निदेशक भीमजी उपाध्याय ने बताया कि 15 अगस्त तक जिले में 1117 आवासों के निर्माण का लक्ष्य मिला था। जिसके सापेक्ष 1119 आवासों का निर्माण शुरू हो गया है। सभी आवासों की जिओ टैगिंग हो चुकी है।
सोमवार को प्रदेश के 75 जिलों में आगरा दूसरे स्थान पर आ गया। इसमें 1093 लाभार्थियों के बैंक खातों के सत्यापन हो चुका है। आवास निर्माण के लिए 1.20 लाख रुपये तीन किश्त में लाभार्थियों को दिए जाएंगे।
992 लाभार्थियों को भेजी गई पहली किश्त
पहली किश्त के रूप में 40 हजार रुपये 992 लाभार्थियों के खातों में भेजे जा चुके हैं। जबकि 70 हजार रुपये की दूसरी किश्त 23 लाभार्थियों को प्रदान की गई है। अंतिम किश्त छत पड़ने के बाद 10 हजार रुपये मिलेगी।
जिले में लक्ष्य के सापेक्ष प्रगति 100.18 फीसदी है। रैकिंग में पहला स्थान शामली को मिला है। जहां 27 आवासों के लक्ष्य के सापेक्ष 30 आवास पर काम शुरू हो चुका है। शामली में प्रगति 111.11 फीसदी है।
जुलाई में था छठवां स्थान
पीएम आवास योजना की रैकिंग में जुलाई में आगरा छटवें स्थान पर था। जून में टॉप-टेन से बाहर था। एक महीने में रैकिंग में तीन पायदान का उछाल आया है। लक्ष्य के सापेक्ष निर्माण की प्रगति और किश्तें जारी होने के आधार पर रैकिंग तय होती है।
टॉप-10 रैकिंग
जिला लक्ष्य निर्माण शुरू प्रगति
शामली 27 30 111.11%
आगरा 1117 1119 100.18%
महाराजगंज 986 987 100.10%
बदायूं 52 52 100%
हाथरस 134 134 100%
बहराइच 22810 22601 99.08%
बिजनौर 928 916 98.71%
देवरिया 1057 1042 97.58%
उन्नाव 4317 4212 97.57%
बलरामपुर 1414 1371 97.34%
जर्जर हो गए तीन हजार आवास
एक तरफ पीएम आवास योजना की रैकिंग में हर माह सुधार हो रहा है। दूसरी तरफ अन्य योजनाओं के तहत निर्बल वर्ग के लिए बने तीन हजार से अधिक आवास नरायच में जर्जर हो गए। 2007-08 में बसपा सरकार में बने इन आवासों का 12 साल बाद भी आवंटन नहीं हो सका है।
ठेकेदार के विरुद्ध एफआईआर दर्ज हो चुकी है। अब एडीए को इन आवासों की मरम्मत के बाद आवंटन करना है। शास्त्रीपुरम, कालिंदी विहार, वायु विहार समेत कई आवासीय योजनाओं का यही हाल है।