पर्यटकों के गंदे हाथों से ताजमहल की संगमरमरी दीवारों पर पड़ रहे दागों से बचने के लिए कांच की दीवार लगाने का प्रस्ताव फिर उठ रहा है।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद गुंबद में अंदरूनी दीवारों और बाहर यमुना किनारे की ओर टफएंड ग्लास (कठोर कांच) लगाने का सुझाव दिया गया है।
एडीजी सुरक्षा ने हाल के दौरे में ताजमहल पर स्टील की रेलिंग को फेल करार दिया था, जिसके बाद शीशे की दीवार को ही मुफीद माना जा रहा है।
ताजमहल
ताजमहल पर एडीजी सुरक्षा विजय कुमार ने उन स्थानों पर कांच की 6 फुट ऊंची दीवार लगाने का सुझाव दिया, जहां पर्यटक सबसे ज्यादा संगमरमरी दीवारों को छूते हैं।
यमुना की ओर से आ रहे कीट पतंगों के कारण दीवारों के हरे रंग का होने से भी इस कांच की दीवार होने पर बचा जा ..सकेगा। एएसआई ने 10 साल पहले शीशे की दीवार का प्रस्ताव तैयार किया था।
तत्कालीन अधीक्षण पुरातत्वविद डा. डीएन डिमरी ने छह फुट ऊंचाई तक टफएंड ग्लास की दीवार लगाने का प्रस्ताव दिया था, जो स्टील की रेलिंग की तर्ज पर ही संगमरमर के ब्लॉक में फंसाकर दीवार के पास रखी जानी थी।
ईरान के पर्सीपोलिस में साइरस टूम में लगा है कांच
ताजमहल
- फोटो : अमर उजाला
पर्यटक पारदर्शी कांच के जरिए पच्चीकारी को देख भी सकते थे और छू भी नहीं पाते। तत्कालीन एएसआई संयुक्त निदेशक डीआर गहलौत और डायरेक्टर मान्यूमेंट सी दोरजी ने भी इस पर सहमति दी थी, लेकिन बाद में मुख्यालय के अधिकारियों ने इसे खारिज कर दिया।
ईरान के शिराज शहर के पास पर्सी पोलिस में 2500 साल पुराने साइरस के टांब का संरक्षण ऐसे ही किया गया है। एएसआई के अधिकारी ईरान में यूनेस्को की ओर से प्रायोजित दौरे पर गए हुए थे, वहां पर पर्सी पोलिस मकबरे में कांच की
दीवार देखी गई।
वहीं से यह प्रस्ताव लिया गया कि ताज में मकबरे के अंदर इसी तरह कांच की दीवार लगा दी जाए, जिससे पर्यटकों को कब्रें भी दिखती रहें और लोग उनसे छेड़छाड़ भी न कर पाएं।
ताज में पर्यटकों के सीढ़ियों से फिसलने पर लगाई गई लकड़ी की सीढ़ियां भी पर्सी पोलिस में देखी गईं थीं। यह तो लागू कर दिया गया, लेकिन कांच की जगह 1.05 करोड़ रुपये की लागत से स्टील की रेलिंग ही लगाई गई, जो विफल साबित हुई।