आगरा मेट्रो के निर्माण कार्य, सीएम ग्रिड के तहत खोदकर छोड़ी गईं सड़कें और सीवर लाइन की खुदाई... इन सभी प्रोजेक्ट में उड़ती धूल के कारण स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में आगरा की रैंकिंग गिर गई। सर्वेक्षण में ताजनगरी देश के टॉप-3 शहरों की सूची से बाहर हो गई। आगरा तीन साल से टॉप-3 में बना हुआ था।
भोपाल के साथ आगरा 192 अंक हासिल कर चौथे स्थान पर लुढ़क गया। 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले नगर निगम क्षेत्रों में आगरा वर्ष 2023 में दूसरे और वर्ष 2024 व 2025 में तीसरे स्थान पर रहा था। 200 में से 198 अंकों के साथ लखनऊ पहले, इंदौर (197) दूसरे और जबलपुर (195) तीसरे स्थान पर रहा।
आगरा नगर निगम के अफसरों के कागजी और फर्जी दावों की कलई स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में खुल गई। सोमवार को सर्वेक्षण की रैंकिंग की घोषणा हुई तो आगरा तीसरे स्थान से लुढ़ककर चौथे पर आ गया। इसका प्रमुख कारण पार्टिकुलेट मैटर-10 में बढ़ोतरी रही।
सीएम ग्रिड के तहत 12 किमी. लंबी सड़कें खुदी पड़ी हैं जिनसे लगातार धूल के गुबार उठ रहे हैं। यही हाल मेट्रो के निर्माण कार्य का है। जल निगम ने 250 किमी. लंबी सीवर और पानी की लाइनें बिछाई हैं। इसके कारण सड़कें खुदी पड़ी हैं और धूल उठ रही है। यही धूल आगरा के स्वच्छ वायु सर्वेक्षण के परिणाम पर भारी पड़ गई।
इस आधार पर मिलते हैं अंक
- डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन और कचरा न जलाना
- सड़कों से उठती धूल और वाहनों का उत्सर्जन
- उद्योगों से होने वाला प्रदूषण और पीएम-10 में कमी
- सड़कों की मरम्मत और गड्ढों का पैचवर्क हो
- ठोस कूड़ा निस्तारण की उसी दिन प्रक्रिया शुरू हो
- कॉम्पैक्टर ट्रांसफर स्टेशन का निर्माण, ये आगरा में दो हैं।
- ग्रीन बेल्ट का निर्माण और वेस्ट टू वंडर पार्क का निर्माण
नगर निगम के पर्यावरण अभियंता पंकज भूषण का कहना है कि इस बार रैंकिंग में हमारे पांच अंक काट दिए गए। हमने इस पर आपत्ति जताई थी। हमारे 192 अंक है। अंक नहीं काटते तो यह 197 होते। पीएम-10 की स्थिति खराब हुई है क्योंकि जगह-जगह निर्माण कार्य चल रहे हैं।
पार्षदों ने उठाए सवाल
पार्षद शरद चौहान ने बताया कि शहर की सफाई के साथ हवा की स्थिति भी खराब हो रही है। तीन साल से टॉप-3 में रहने पर हमें नंबर-1 की ओर बढ़ना था। नगर निगम उल्टा चला और हमारी रैंकिंग चाैथे स्थान पर पहुंच गई। अब तो अधिकारी जिम्मेदारी निभा लें।
पार्षद रवि माथुर का कहना है कि कागजों पर स्प्रिंकलर चल रहे हैं। डिवाइडरों से मिट्टी हटाई नहीं जा रही लेकिन करोड़ों रुपये के भुगतान हो रहे हैं। ऐसे कागजी कामों से रैंकिंग भला कैसे सुधरती। अब भी समय है। सबक लेकर सुधार करें।
पार्षद मीना प्रजापति ने बताया कि एमजी रोड पर निकलते ही स्वच्छ वायु की असलियत पता चल जाएगी। अफसर एसी कारों में शीशे बंद करके निकलते हैं इसलिए धूल पता नहीं चलती। सड़क पर उतरकर देखेंगे तो सच्चाई दिखेगी।