एसटीएफ की टीम शिव सिंह को पकड़कर उसे रामा मेडिकल स्टोर और रामा क्लीनिक पर लेकर गई। ताला खुलवाकर जांच करने पर मेडिकल स्टोर में टैबलेट, सिरप, इंजेक्शन समेत कई तरह की दवाएं मिलीं। पूछताछ में शिव सिंह के पास मेडिकल स्टोर का लाइसेंस और चिकित्सकीय डिग्री भी नहीं थी।
खुद को कभी इंटरपास तो कभी स्नातक बता रहा था। दो कट्टों में दवाएं भरकर जब्त कर ली हैं। इनकी कीमत एक लाख रुपये से अधिक है। जांच के लिए पांच नमूने लेकर लैब भेज दिए हैं। थाना ताजगंज प्रभारी ने बताया कि दवाएं जलाने के मामले में जांच टीम ने सगे भाइयों में से एक शिव सिंह को पकड़ लिया है। उसका भाई अभी गिरफ्त में नहीं आ सका है। रिपोर्ट दर्ज की जा रही है।
उपयोग किए गए इंजेक्शन मिले
टीम में शामिल स्वास्थ्य विभाग के डॉ. सुशील कुमार ने बताया कि छापे में नगला पेमा स्थित रामा क्लीनिक का भी संचालन होता मिला। इसको शिव सिंह का भाई चलाता है। इसके यहां दो बेंच पड़ी थीं। उपयोग किए गए सिरिंज, इंजेक्शन की वाइल, ग्लूकोज की ड्रिप समेत अन्य बायोमेडिकल वेस्ट मिला। इससे यह स्पष्ट है कि यहां मरीजों का इलाज भी किया जाता है। इसका लाइसेंस भी नहीं मिला है।
बोर्ड पर झोलाछाप ने अपने नाम के आगे लिखा था डॉक्टर
रामा क्लीनिक और रामा मेडिकल स्टोर के बोर्ड पर शिव सिंह ने अपने नाम के आगे डॉक्टर लिख रखा है। इसके अलावा डॉ. मोहन सिंह, डॉ. पुष्पेंद्र सिंह, डॉ. डीपी शर्मा का भी नाम लिखा है। डीपी शर्मा के नीचे नर्सिंग ऑफिसर लिखा है। आरोपियों के खिलाफ ताजगंज थाने में तहरीर दी गई है।
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