साइबर अपराधियों ने 7 हजार से अधिक फर्जी सिम और यूपीआई आईडी के जरिए सवा साल में 30 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी की। पुलिस ने सैकड़ों नंबर ब्लॉक कराए और गिरोह से जुड़े कई आरोपियों को गिरफ्तार कर जांच तेज कर दी है।
आपका क्रेडिट स्कोर कम है। इसे और बढ़ाया जा रहा है...। आपने अपने खाते में टेरर फंडिंग कराई है। पुलवामा आतंकी हमले में शामिल थे...। निवेश करने पर 30 प्रतिशत का लाभ होगा। व्हॉट्सएप ग्रुप से जुड़कर हर दिन मुनाफा देखो...। यह वो तरीके हैं, जिन्हें अपनाकर साइबर अपराधियों ने पिछले सवा साल में आगरा के हजारों लोगों से 30 करोड़ से अधिक की ठगी की। इसके लिए उन्होंने सात हजार से अधिक फर्जी नंबरों की मदद ली। इन नंबरों को फर्जी दस्तावेजों के सहारे लिया गया और इस्तेमाल के बाद बंद कर दिया गया। गृह मंत्रालय से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ऐसे सिम ब्लॉक कराने में जुटी है।
विज्ञापन
एडीसीपी आदित्य सिंह ने बताया कि धोखाधड़ी पूरे हाईटेक तरीके से हो रही है। सिम खरीदने के लिए फर्जी दस्तावेज का प्रयोग किया जा रहा है। यूपीआई आईडी और बैंक खाते खोलकर करोड़ों की रकम जमा कराकर इस्तेमाल बंद कर दिया जाता है। नंबरों को चिह्नित कर पुलिस ने उन लोगों के घर दस्तक दी, जिनके दस्तावेज लगे हुए थे। पता चला कि सिम लेने के लिए लगे दस्तावेज किसी मजदूर, ठेल-फड़ लगाने वालों के थे।
बड़ी संख्या में लोगों को इस बात की जानकारी ही नहीं थी कि उनके दस्तावेज से कोई सिम भी चल रहा है। कई लोगों को सिम जारी होने का पता था लेनिक डेबिट कार्ड या यूपीआई की जानकारी नहीं थी। एडीसीपी ने बताया कि जनवरी और फरवरी 2026 में ही 1750 से अधिक नंबर चिह्नित कर बंद कराए गए हैं।
पोर्टल की मदद से मोबाइल पर लग रहा ताला
एडीसीपी के मुताबिक, पुलिस या पीड़ित खुद केंद्रीय उपकरण पहचान रजिस्टर (सीईआईआर) पोर्टल पर जाकर मोबाइल के आईएमईआई नंबर को ब्लॉक करा सकते हैं। इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर की रिपोर्ट पर व्हॉट्सएप नंबर से ठगी में शामिल डिवाइस को ब्लॉक करने का निर्देश दिया जाता है। प्राथमिकी दर्ज कराने के बाद पुलिस टेलीकॉम ऑपरेटरों को सिम कार्ड ब्लॉक करने के लिए निर्देशित करती है।
आगरा पुलिस ने गिरफ्तार किए 45 अपराधी
एडीसीपी ने बताया कि साइबर ठगी में आगरा में पिछले 26 महीने में 200 लोगों पर पुलिस कार्रवाई कर चुकी है। इनमें 45 लोग फर्जी दस्तावेज से सिम जारी कराने वाले थे। इनको वो साइबर ठगी करने वाले गिरोह को कमीशन पर बेचने का काम कर रहे थे।
इन बातों का रखें ध्यान
कंपनी के अधिकृत सिम विक्रेता से ही सिम लेना चाहिए। कैनोपी में सिम बेचने वालों से सावधान रहें।
सिम विक्रेता दस्तावेज लेने के दौरान मोबाइल से दो बार फोटो खींचकर सत्यापन कर रहा है तो उसकी शिकायत करें।
साइबर ठगी होने पर तत्काल 1930 पर कॉल करना चाहिए। इससे संबंधित मोबाइल नंबर और बैंक खातों को ब्लॉक कराया जा सकता है।