अप्रैल 2011 में दर्ज हुआ था मुकदमा
भूरी सिंह ने 29 मार्च को डीएम को तहरीर दी थी। पीड़ित की तहरीर पर एत्माद्दौला थाने में 20 अप्रैल 2011 को धारा धारा 313, 308 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। विवेचना के दौरान मनीषा की मौत होने पर पुलिस ने धारा 308 को 304 में तरमीम कर दिया। मुकदमे के विचारण के दौरान सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता रूपेश गोस्वामी ने वादी सहित छह गवाह अदालत में पेश किए। साक्ष्यों के आधार पर अपर जिला जज रनवीर सिंह ने अस्पताल संचालक डॉ. केपी सिंह निवासी गांव मनापुर थाना डिबाई जिला बुलंदशहर को दस वर्ष सश्रम कारावास और 41,000 जुर्माने की सजा सुनाई।
अदालत ने डीएम को दिए-निर्देश
अदालत ने फैसले की एक प्रति डीएम को भी प्रेषित करने की कहा, जिससे कि वह प्राइवेट नर्सिंग होम एवं हॉस्पीटल के लाइसेंस के पंजीकरण को निर्धारित सभी नियम व शर्तों का कड़ाई से अनुपालन कराएं। प्रशिक्षित एवं अनुभवी टीम से निगरानी कराया जाना सुनिश्चित करें।