मामले के अनुसार, खाद्य सुरक्षा अधिकारी रवींद्र सिंह परमार ने 24 फरवरी 2025 को भगवान टॉकीज क्रॉसिंग के पास स्थित विशाल मेगा मार्ट का औचक निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान वहां फर्स्ट क्रॉप ब्रांड के साबूदाने के 200 ग्राम वाले 100 पैकेट बिक्री के लिए रखे मिले थे। मिलावट का संदेह होने पर अधिकारियों ने नियमानुसार साबूदाने के चार पैकेट नमूने के तौर पर खरीदे और उन्हें जांच के लिए राजकीय प्रयोगशाला लखनऊ भेजा। 15 अप्रैल 2025 को आई खाद्य विश्लेषक की रिपोर्ट में साबूदाने को मानकों से कमतर पाया गया, जो कि अधिनियम की धारा 26(2)(ii) का उल्लंघन था।
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इसके बाद विभाग ने सहायक आयुक्त (खाद्य)-II की अनुमति से न्यायालय में वाद दायर किया। अदालत की ओर से प्रतिवादियों को दिसंबर 2025 में नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया। बार-बार अवसर दिए जाने के बावजूद न तो स्टोर प्रबंधन की ओर से कोई हाजिर हुआ और न ही कोई स्पष्टीकरण दाखिल किया गया।
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प्रतिवादियों के लगातार गैर-हाजिर रहने पर अदालत ने मामले में एकपक्षीय कार्रवाई की। पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों और लैब रिपोर्ट के आधार पर एडीएम सिटी कोर्ट ने विशाल मेगा मार्ट के मैनेजर वीरेंद्र सिंह पर 40 हजार रुपये और हरियाणा के फरीदाबाद की साबूदाने की निर्माता व पैकर कंपनी मैसर्स पैसिफिक फूड कॉर्पोरेशन पर 75 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि यदि एक महीने के भीतर जुर्माने की राशि जमा नहीं की गई, तो इसकी वसूली भू-राजस्व की तरह सख्ती से की जाएगी।
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