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आगरा कोरोना वायरस: 451वीं मौत, चार नए संक्रमित मिले, अब 117 सक्रिय मरीज

Sat, 19 Jun 2021 12:21 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

शुक्रवार को 7938 लोगों की जांच की गई। कुल 25629 मरीज मिल चुके हैं। जिनमें 25061 मरीज ठीक हो चुके हैं। मरीजों के स्वस्थ होने की दर 97. 78फीसदी हो गई है।
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कोरोना वासरस: टेस्ट सैंपल लेता कर्मचारी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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ताजनगरी में शुक्रवार को एक और संक्रमित की मृत्यु होने से मृतक संख्या 451 पहुंच गई। पिछले 24 घंटे में चार नए मरीज मिले हैं। जिले में अब 117 सक्रिय मरीज हैं। कोविड के आंकड़ों पर शुरू से सवाल उठते रहे हैं। गुरुवार को 155 सक्रिय मरीज थे। शुक्रवार को 117 सक्रिय मरीज रह गए।

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जिला प्रशासन के मुताबिक 38 मरीज ऐसे थे, जिनके नाम दो-दो बार रिकॉर्ड में दर्ज थे। उन मरीजों को छांट कर नाम हटाए हैं। इसलिए अब सक्रिय मरीज 117 रह गए हैं। जिले में मृतक संख्या 451 हो गई हैं। शुक्रवार को 7938 लोगों की जांच की गई। कुल 25629 मरीज मिल चुके हैं। जिनमें 25061 मरीज ठीक हो चुके हैं। मरीजों के स्वस्थ होने की दर 97. 78फीसदी हो गई है।

मई तक 15 हजार संक्रमित मरीज मिले
सीएमओ डॉ. आरसी पांडेय ने बताया कि पहली लहर में मार्च 2020 से मार्च 2021 करीब 10500 लोग संक्रमित हुए, इनमें से लगभग 20 से 25वें परिवार में सामूहिक रूप से संक्रमित मिल रहे थे और परिवार के एक सदस्य को अस्पताल में भर्ती होने की नौबत पड़ रही थी, दूसरी लहर की बात करें तो अप्रैल से मई तक 15000 संक्रमित मरीज मिले और लगभग पूरा परिवार ही कोरोना की चपेट में आया, संक्रमित हर पांचवें परिवार में से एक सदस्य को अस्पताल भर्ती होना पड़ा। फेफडे़ खराब होने से मौतें भी ज्यादा हुईं।

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रिपोर्ट निगेटिव पर फेफड़ों में मिला संक्रमण
एसएन मेडिकल कॉलेज के वक्ष एवं क्षय रोग विभाग के डॉ. जीवी सिंह ने बताया कि कोविड अस्पताल में ऐसे कई मरीज भर्ती हुए, जिनकी रिपोर्ट निगेटिव आई, लेकिन फेफड़ों में संक्रमण मिला। इसी कारण कई मरीज देर से भी अस्पताल पहुंचे। सांस तक नहीं ले पा रहे थे, तत्काल आईसीयू में शिफ्ट करना पड़ा। 

वायरस आंतरिक बदलाव कर बना घातक
एसएन मेडिकल कॉलेज के माइक्रो बायोलॉजी विभाग के डॉ. संजीव सिंह ने बताया कि पहली लहर में संक्रमित मरीज से एक या दो ही लोग ही चपेट में आ रहे थे, लेकिन दूसरी लहर में यह कई गुना और तेजी से लोगों को संक्रमित करने लगा, इसकी वजह यह रही कि पहली लहर में के बाद वायरस ने आंतरिक बदलाव कर घातक रूप धर लिया, इससे संक्रमण की दर और मौतें ज्यादा हुईं। 

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