आगरा में एक वृद्ध ने पूर्वी जोन के इंस्पेक्टर पर बेटे को साजिशन फंसाने और बहू से मिलीभगत के आरोप लगाए हैं। वृद्ध का दावा है कि थाने में जब्त मोबाइल से सोशल मीडिया पोस्ट दिखाकर बेटे पर तीसरी प्राथमिकी दर्ज की गई है।
आगरा के पूर्वी जोन में तैनात एक इंस्पेक्टर से परेशान वृद्ध ने सोशल मीडिया पर पोस्ट डाली है। उन्होंने आरोप लगाया कि इंस्पेक्टर बहू के साथ मिलकर बेटे को फंसा रहे हैं। दो बार प्राथमिकी दर्ज कर जेल भेज चुके हैं। अब एक और प्राथमिकी सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट करने के मामले में दर्ज की है। पिता का आरोप है कि पुलिस ने बेटे का मोबाइल थाने में जब्त कर रखा है। उसी मोबाइल से पोस्ट करने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की गई है। उन्होंने जांच कर इंस्पेक्टर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
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65 वर्षीय वृद्ध का कहना है कि बेटे ने अगस्त, 2024 में बाह की युवती से कोर्ट मैरिज की थी। पहले वो बेटे का रिश्ता कहीं और तय कर रहे थे मगर युवती ने शादी तुड़वा दी थी। उसने खुद को बेटे की पत्नी बताया। इस पर दोनों का रिश्ता तय करा दिया। बहू एक शोरूम में काम करती थी, लेकिन पत्नी पर बेटे को शक था। उसने नाैकरी छोड़ने को कहा तो विवाद हो गया। बाद में बेटे पर शोरूम के एक कर्मचारी ने जानलेवा हमले का झूठा आरोप लगाकर प्राथमिकी दर्ज करा दी। पुलिस ने उसे जेल भेज दिया। वह 26 दिन बाद जमानत पर छूटा।
पीड़ित बेटे का आरोप है कि 11 दिन बाद पुलिस रास्ते से उसको पकड़कर ले गई। उसके खिलाफ बहू की तहरीर पर दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट में प्राथमिकी दर्ज कर जेल भेज दिया। प्राथमिकी की जानकारी जेल जाने पर हुई। बहू ने खुद को नाबालिग दर्शा दिया। 6 महीने बाद जमानत पर बाहर आया। पुलिस ने मोबाइल सहित अन्य सामान थाने में जमा कर लिया था। वह मोबाइल वापस लेने के लिए थाने के चक्कर लगाते रहे मगर सुनवाई नहीं हुई। अब तीसरी प्राथमिक दर्ज कर ली गई है। इसमें आरोप लगाया कि उसने फर्जी आईडी बनाकर बदनाम किया। अब फिर से पुलिस जेल भेजने की तैयारी कर रही है। वह कई अधिकारियों को प्रार्थना पत्र दे चुके हैं। कहीं सुनवाई नहीं हो रही है। थक-हारकर उन्हें सोशल मीडिया का सहारा लेना पड़ा।
पीड़ित के सवाल
- थाने में जब्त मोबाइल पर ही फर्जी आईडी बनाकर साजिश के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। जांचकर्ता अगर आईपी एड्रेस निकालेंगे तो सब कुछ सामने आ जाएगा।
- मोबाइल की लोकेशन से भी पुलिस जानकारी जुटा सकती है। तीनों मामलों की जांच किसी निष्पक्ष एजेंसी से कराई जानी चाहिए।
- थाने के सीसीटीवी देखे जाने चाहिए। कर्मचारियों से पूछताछ की जानी चाहिए। बहू का थाने में आना-जाना कब-कब होता है, यह पता किया जाए।